बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य ,गणाचार्य , समाधि सम्राट परम पूज्य 108 श्री विरागसागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका रत्न श्रमणी आर्यिका पूज्य 105 श्री विजिज्ञासाश्री माताजी संघस्थ ब्रह्मचारिणी रुबी दीदी शाहगढ एवं सरस्वती दीदी बक्सवाहा के द्वारा मोक्ष मार्ग पर बढ़ते कदम को दृष्टिगत रखते हुए आर्य का दीक्षा की