जिले में वाहनों की फिटनेस जांच पिछले करीब 8 महीना से मैनुअल तरीके से की जा रही है। सरकार के निर्देशों के अनुसार वाहन फिटनेस केवल एटीएस के जरिए होनी थी। मुख्यालय पर बने दो केदो को समय रहते एटीएस में अपग्रेड नहीं किया गया नतीजा यह हुआ कि आधुनिक मशीनों के बजाय मैन्युअल व्यवस्था के भरोसे हर महीने करीब 400 वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जा रहा है।