जीवनभर वर्दी पहनकर अनुशासन, कर्तव्य और ईमानदारी की मिसाल बने एक पिता ने शायद सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस घर में वे सुरक्षित बुढ़ापा बिताने लौटे हैं, वही घर उनकी अंतिम सांसों का गवाह बनेगा। बीएमपी से सेवानिवृत्त मंगल हसदा ने एक महीने पहले ही सेवा से विदा ली थी—यह सोचकर कि अब शेष जीवन बच्चों और परिवार के साथ सुकून से बीतेगा।