इस आधुनिक युग मे भी छुआछूत का बोल बाला है।ऐसे नजारो की तश्वीर अक्सर उत्तर भारत क्षेत्र में यदा कदा शोषल मीडिया के माध्यम से खास कर ग्रामीण क्षेत्र में देखी व सुनी जा सकती सकती है।अनपड़ ऐसा कृत्य करे तो उसे अज्ञानता माना जा सकता है।लेकिन जब पढ़े लिखे लोग ऐसा कृत्य करते तो उससे मानवता ही शर्मशार होती है।ऐसा ही एक मामला आंगनवाड़ी केंद्र ललचहा से आया प्रकाश में।