13 जुलाई 2026 को स्पर सेब का रुझान फिर से चर्चा में है। परमाणु मंडी में इसका भाव ₹4,100 प्रति पेटी रहा, जबकि एक दिन पहले भट्टाकुफर मंडी में यह लगभग ₹3,700 प्रति पेटी बिका।
पिछले साल जिस स्पर सेब को कुछ बागवानों, खरीदारों और आढ़तियों ने जमकर कोसा था और जिसे असफल वैरायटी तक घोषित कर दिया गया था, वही स्पर सेब 2026 में ₹4,100 प्रति पेटी के आंकड़े को पार कर रहा है। तो क्या इस साल इसमें अचानक स्वाद आ गया? क्या इस साल यह कच्चा सेब नहीं रहा? सच यह है कि बाजार में हर फसल के अच्छे और कमजोर साल आते हैं। पिछले साल स्पर सेब पर मंदी और अधिक उत्पादन का असर पड़ा था, लेकिन इस साल इसके शुरुआती रुझान काफी मजबूत दिखाई दे रहे हैं और आगे चलकर इसके दाम गाला सेब से भी अधिक मिल सकते हैं।
जब भी सोशल मीडिया पर हम स्पर सेब की पोस्ट डालते थे, कुछ लोग टिप्पणी करते थे कि स्पर का भविष्य खत्म हो चुका है और इसका बाजार नहीं रहा। लेकिन स्पर सेब ने एक बार फिर साबित कर दिया कि किसी एक सीजन के आधार पर किसी वैरायटी का भविष्य तय नहीं किया जा सकता।
दुनिया के कई देशों में स्पर आधारित रेड डिलीशियस समूह की वैरायटी जैसे स्कारलेट, रेड वेलॉक्स, किंग रॉट और अन्य आज भी बड़े पैमाने पर उगाई और बेची जाती हैं। शिमला की मंडियों और खुदरा बाजारों में आज भी अच्छे गुणवत्ता वाले स्पर सेब को चार सौ रुपये प्रति किलोग्राम ऊंचे दाम मिल रहे हैं।
दूसरी ओर, गाला की लगातार बढ़ती बागवानी आने वाले वर्षों में बाजार पर दबाव बना सकती है। यदि किसी एक वैरायटी का उत्पादन बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो स्वाभाविक रूप से बागवान विकल्पों की ओर भी देखेंगे और स्पर सेब की मांग फिर बढ़ सकती है।
पिछले साल रॉयल और अन्य शुरुआती वैरायटी की भरमार ने स्पर की मांग को प्रभावित किया था, लेकिन पिछली साल वही "फेल सेब" कहे जाने वाला स्पर इस साल ₹4,000 प्रति पेटी के पार पहुंच चुका है। बाजार का यही स्वभाव है — आज का कमजोर खिलाड़ी कल का सितारा बन सकता है।