रोशनी और उत्साह उमंग का पर्व भी किसानों के चेहरे पर खुशी नहीं ला सका। दो साल से गन्ने का बकाया नहीं मिलना और चीनी मिल भी अभी तक नहीं चली और ना ही धान बिक पाया। इससे किसानों के पास त्योहार की खुशियां फीकी रहीं। किसानों ने कर्ज लेकर दिवाली में खरीदारी की।