वाराणसी। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और वेदों के मूल स्वरूप की शुद्धता को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन (घनपाठ विमोचन समारोह) में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने आज वेदों की अष्टविकृतियो को वेदों के मूल स्वरूप का अजेय संरक्षक घोषित किया।