अंग्रेज़ी में जवाब नहीं दे पाए… तो गांव में खुलवा दिया स्कूल
कर्नाटक के समाजसेवी और पद्मश्री सम्मानित हरेकला हजब्बा की कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है। संतरे बेचकर अपना जीवनयापन करने वाले हजब्बा स्वयं औपचारिक शिक्षा से वंचित रहे। बताया जाता है कि एक दिन कुछ विदेशी पर्यटकों ने उनसे अंग्रेज़ी में संतरे का दाम पूछा, लेकिन वे जवाब नहीं दे सके। इस घटना ने उन्हें गहराई से सोचने पर मजबूर किया और उन्होंने संकल्प लिया कि उनके गांव के बच्चों को शिक्षा के अभाव का सामना नहीं करना पड़े। इसके बाद उन्होंने वर्षों तक अपनी कमाई से पैसे बचाए और गांव में स्कूल शुरू कराने के लिए लगातार प्रयास किए। उनकी इसी निस्वार्थ सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2020 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। आज हरेकला हजब्बा इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि एक छोटा-सा संकल्प भी पूरे समाज के भविष्य को बदल सकता है
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