*आदिवासी समाज ने नौवें वर्ष स्थापित की रावण पेन की मूर्ति, गोंड समाज में पूज्य हैं रावण*
छिंदवाड़ा के ग्राम जमनिया क्षेत्र में नवरात्रि पर जहां देवी की स्थापना हो रही है, वहीं आदिवासी बाहुल्य इलाके में गोंड समाज द्वारा रावण पेन की स्थापना कर पूजा की जा रही है।
पंडाल में मौजूद युवक *सुमित कल्ला* ने जानकारी देते हुए बताया कि यह रावण पेन को बिठाने का *नौवां वर्ष* है। नौ वर्षों से लगातार यहां रावण पेन की स्थापना कर उनकी पूजा-अर्चना की जा रही है।
उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज की मान्यता के अनुसार *रावण पेन आदिवासी वंशज थे और मरावी गोत्र के थे।* आदिवासी समाज में 750 गोत्र होते हैं, उन्हीं में से एक गोत्र मरावी है। इस कारण गोंड आदिवासी समाज उन्हें अपना *प्रेम पुरखा / वंशज* मानता है और उनकी स्थापना कर पूजा करता है।
सुमित ने बताया कि आदिवासी समाज की पूजा पांच तत्वों की होती है, जिसे वे *पांच कलश* के रूप में दर्शाते हैं और पांच तत्व मानकर पूजा करते हैं।
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