मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग अंतर्गत शासकीय विद्यालयों में विगत 17–18 वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों का भविष्य आज भी असुरक्षित बना हुआ है। हाल ही में सरकार द्वारा कैबिनेट में कर्मचारियों के लिए प्रस्ताव पारित किया गया, लेकिन अतिथि शिक्षकों को किसी भी कैडर में शामिल नहीं किया गया, जिससे उनमें आक्रोश व्याप्त है।