*: बैरिया के नौरंगा गांव में गंगा कटान से हाहाकार, एसडीएम के निरीक्षण पर भड़के ग्रामीण, बोले- "कागजी कार्रवाई से गांव नहीं बचेगा"*ग्रामवासियों ने दी चेतावनी सामुहिक आत्मदाह या धरना प्रदर्शन करेंगे
*बैरिया, बलिया।* बैरिया तहसील की ग्राम पंचायत नौरंगा में पिछले एक दशक से गंगा नदी कटान के रूप में कहर बरपा रही है। नदी के उस पार बसी नौरंगा पंचायत हर साल कटान की चपेट में आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और बाढ़ विभाग की ओर से बंधे को बचाने के लिए जो प्रयास चल रहे हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं।
*जिलाधिकारी से शिकायत के बाद पहुंचे एसडीएम*
कटान से परेशान ग्रामीणों ने सोमवार को जिलाधिकारी से मिलकर अपनी पीड़ा बताई थी। जिसके अनुपालन में मंगलवार को उप जिलाधिकारी बैरिया मौके पर पहुंचकर कटान का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जब ग्रामीणों ने एसडीएम से पूछा कि "सर, चट्टी नौरंगा से नौरंगा तक जगह-जगह पार्को पॉइंट और एसी बैग लगाए जाने के बावजूद जगह-जगह कटान हो रहा है, तो इसका समाधान क्या है?"
इस पर एसडीएम ने कहा कि "हमने स्थिति देख ली है और वास्तविकता के आधार पर जिलाधिकारी को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दूंगा।"
*एसडीएम के बयान पर भड़के युवा, प्रधान ने संभाला मोर्चा*
एसडीएम के इस जवाब से गांव के कुछ युवा भड़क गए। उनका कहना था कि हर बार सिर्फ रिपोर्ट का आश्वासन मिलता है, धरातल पर कोई काम नहीं होता। स्थिति बिगड़ते देख नौरंगा गांव के प्रधान ने बीच-बचाव किया और मामले को शांत कराया। प्रधान ने एसडीएम से नौरंगा गांव के अस्तित्व को बचाने के लिए कटान रोधी कार्यों को तत्काल तेज किए जाने की मांग की।
*ग्रामीण स्वयं कर रहे बंधा निर्माण, विभाग के सिर्फ 2-3 कर्मचारी मौजूद*
मौके पर देखने को मिला कि भुआल छपरा के युवाओं ने बांस-बल्ली और बालू भरी बोरियों के सहारे बंधा निर्माण को स्वयं अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि बाढ़ विभाग के सिर्फ दो-तीन कर्मचारी ही बंधा बचाव के कार्य में जुटे दिखाई दिए।
उक्त बंधे पर लगभग 7 से 8 जगहों पर पार्को पॉइंट और एसी बैग लगाए जाने के बावजूद बंधे से भूस्खलन लगातार जारी है।
*ग्रामीणों की मांग: समय रहते कदम न उठा तो गांव का अस्तित्व खतरे में*
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया तो नौरंगा गांव का अस्तित्व बचाना असंभव हो जाएगा। कटान के कारण अब तक दर्जनों बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है।
इस संबंध में ग्रामीणों ने कहा कि "हर साल सिर्फ खानापूर्ति होती है। अब हमें स्थायी समाधान चाहिए, वरना हमारा गांव, हमारी जमीन सब नदी में चली जाएगी।"
Ballia, Ballia | Jul 10, 2026