सोमवार शाम 5 बजे उपार्जन केंद्र पर हालात बदतर नजर आए। बिस्टान सोसायटी द्वारा संचालित इस केंद्र पर 50 से 60 गेहूं से भरे ट्रैक्टर कतार में खड़े हैं, लेकिन प्रशासन की सुस्ती के कारण सिर्फ एक तौल कांटा चालू है। आलम यह है कि एक किसान की बारी आने में 3 से 4 दिन लग रहे हैं। भीषण गर्मी में किसानों के लिए न बैठने की जगह है और न ही कैंटीन की व्यवस्था।