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दरभंगा: कांग्रेस प्रत्याशी उस्मानी का जनता को संबोधित करते हुए मंच टूटा

9.6k views | Darbhanga, Darbhanga | Oct 30, 2020

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भ्रष्टाचार उजागर करने वालों पर कार्रवाई या सच्चाई दबाने की कोशिश? ईओयू के सूचक और पत्रकार की गिरफ्तारी से उठे बड़े सवाल

केवटी बीडीओ के खिलाफ ईओयू जांच का आधार बने सूचक और घोटालों की खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार को एससी-एसटी एक्ट में भेजा गया जेल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

दरभंगा।जिले के केवटी प्रखंड से सामने आया एक मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा और बहस का विषय बन गया है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) द्वारा केवटी के तत्कालीन बीडीओ चंद्र मोहन पासवान के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई के आधार बने सूचक बनबारी गांव निवासी इकबाल अंसारी तथा विभिन्न वित्तीय अनियमितताओं और कथित घोटालों से जुड़ी खबरों को प्रकाशित करने वाले पत्रकार विजय कुमार गुप्ता को एससी-एसटी एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि सूचक द्वारा की गई शिकायत के आधार पर 27 मई 2026 को आर्थिक अपराध इकाई ने बीडीओ के दरभंगा और मधुबनी सहित छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईओयू ने स्वयं प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आय से अधिक संपत्ति मिलने की पुष्टि की थी। यह कार्रवाई पूरे बिहार में सुर्खियों में रही थी।

दूसरी ओर, पत्रकार विजय कुमार गुप्ता लगातार प्रखंड स्तर पर विकास योजनाओं में कथित अनियमितताओं, वित्तीय गड़बड़ियों तथा पंचायत स्तर पर सरकारी राशि के दुरुपयोग से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाते रहे थे।

इसी बीच 7 जून 2026 को प्रमुख जिवछी देवी की ओर से दोनों के खिलाफ केवटी थाना में एससी-एसटी एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, जिसमें रंगदारी मांगने, अवैध वसूली करने और प्रताड़ित करने जैसे आरोप लगाए गए।

हालांकि, स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। चर्चा इस बात की है कि प्राथमिकी में कथित घटनाओं की स्पष्ट तिथि, समय और तकनीकी साक्ष्यों का उल्लेख नहीं है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि शिकायतकर्ता पक्ष ने स्वयं अपने आवेदन में स्वीकार किया है कि उनके कार्यों के विरुद्ध प्रमंडलीय आयुक्त, जिला पदाधिकारी, लोक शिकायत निवारण कार्यालय सहित कई मंचों पर आवेदन दिए गए थे।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों को उजागर करने वाले व्यक्तियों पर इतनी त्वरित कार्रवाई क्यों हुई, जबकि उनके द्वारा उठाए गए आरोपों की गहन जांच अब तक पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हो सकी है।

लोकतंत्र में पत्रकारिता और जनहित में शिकायत दर्ज कराना व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि सत्य सामने आ सके और किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।

बिहार सरकार लगातार भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की बात करती रही है। ऐसे में यह मामला केवल दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को पर्याप्त सुरक्षा और न्याय मिल रहा है या नहीं।

जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवश्यक है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो तथा जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

#Darbhanga #Keoti #EOU #CorruptionCase #Journalism #RightToInformation #BiharNews #JusticeForTruth #PressFreedom

भ्रष्टाचार उजागर करने वालों पर कार्रवाई या सच्चाई दबाने की कोशिश? ईओयू के सूचक और पत्रकार की गिरफ्तारी से उठे बड़े सवाल केवटी बीडीओ के खिलाफ ईओयू जांच का आधार बने सूचक और घोटालों की खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार को एससी-एसटी एक्ट में भेजा गया जेल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज दरभंगा।जिले के केवटी प्रखंड से सामने आया एक मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा और बहस का विषय बन गया है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) द्वारा केवटी के तत्कालीन बीडीओ चंद्र मोहन पासवान के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई के आधार बने सूचक बनबारी गांव निवासी इकबाल अंसारी तथा विभिन्न वित्तीय अनियमितताओं और कथित घोटालों से जुड़ी खबरों को प्रकाशित करने वाले पत्रकार विजय कुमार गुप्ता को एससी-एसटी एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गौरतलब है कि सूचक द्वारा की गई शिकायत के आधार पर 27 मई 2026 को आर्थिक अपराध इकाई ने बीडीओ के दरभंगा और मधुबनी सहित छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईओयू ने स्वयं प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आय से अधिक संपत्ति मिलने की पुष्टि की थी। यह कार्रवाई पूरे बिहार में सुर्खियों में रही थी। दूसरी ओर, पत्रकार विजय कुमार गुप्ता लगातार प्रखंड स्तर पर विकास योजनाओं में कथित अनियमितताओं, वित्तीय गड़बड़ियों तथा पंचायत स्तर पर सरकारी राशि के दुरुपयोग से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाते रहे थे। इसी बीच 7 जून 2026 को प्रमुख जिवछी देवी की ओर से दोनों के खिलाफ केवटी थाना में एससी-एसटी एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, जिसमें रंगदारी मांगने, अवैध वसूली करने और प्रताड़ित करने जैसे आरोप लगाए गए। हालांकि, स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। चर्चा इस बात की है कि प्राथमिकी में कथित घटनाओं की स्पष्ट तिथि, समय और तकनीकी साक्ष्यों का उल्लेख नहीं है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि शिकायतकर्ता पक्ष ने स्वयं अपने आवेदन में स्वीकार किया है कि उनके कार्यों के विरुद्ध प्रमंडलीय आयुक्त, जिला पदाधिकारी, लोक शिकायत निवारण कार्यालय सहित कई मंचों पर आवेदन दिए गए थे। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों को उजागर करने वाले व्यक्तियों पर इतनी त्वरित कार्रवाई क्यों हुई, जबकि उनके द्वारा उठाए गए आरोपों की गहन जांच अब तक पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हो सकी है। लोकतंत्र में पत्रकारिता और जनहित में शिकायत दर्ज कराना व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि सत्य सामने आ सके और किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। बिहार सरकार लगातार भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की बात करती रही है। ऐसे में यह मामला केवल दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को पर्याप्त सुरक्षा और न्याय मिल रहा है या नहीं। जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवश्यक है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो तथा जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। #Darbhanga #Keoti #EOU #CorruptionCase #Journalism #RightToInformation #BiharNews #JusticeForTruth #PressFreedom

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