राजसमंद: 'पेड़ों की नगरी' पिपलांत्री की एक और हकीकत, अरना गांव के श्मशान में पानी का राज; विकास के दावे धरे रह गए
एक तरफ पिपलांत्री को 'पेड़ों की नगरी' कहकर सराहा जाता है, वहीं दूसरी तरफ अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत सुविधा में यह कमी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की घोर लापरवाही को उजागर करती है। विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले क्या इस मानवीय पीड़ा को देख पा रहे हैं? इस स्थिति पर ग्रामीणों के मन में एक ही सवाल है, कि "झूमें हम किस बात पर?"