अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में “शिक्षक की पाती” अभियान की प्रगति पर चर्चा करते हुए टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आगे की रणनीति तय की गई। शिक्षक नेताओं ने बताया कि 9 से 15 मार्च तक पोस्टकार्ड, ईमेल और ट्विटर के माध्यम से शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को शिक्षकों की पीड़ा से अवगत कराया जा रहा है।