सांसद संतोष पाण्डेय ने कहाँ की रेंगाखार जंगल,कवर्धा छत्तीसगढ़ की धरती पर महुआ केवल एक वनोपज नहीं, बल्कि आदिवासी भाई-बहनों की आजीविका, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। सदियों से महुआ के फूलों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है और हजारों परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया है।