हरिद्वार में एक मरीज की मौत के बाद अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मामला इलाज में कथित लापरवाही, पैसों की मांग और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। मृतका के बेटे ने पुलिस को शिकायत देकर संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता मुकेश, निवासी रामधाम कॉलोनी, रानीपुर, हरिद्वार के अनुसार, उन्होंने अपनी मां निर्मला को 15 अक्टूबर 2026 को विनायक हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान उनसे लगातार पैसे जमा कराए गए। शिकायत में 50 हजार रुपये जमा कराने और इसके बाद भी इलाज के लिए पैसे मांगे जाने का जिक्र किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी मां को बाद में दूसरे अस्पताल में भेजा गया। वहां डॉक्टर द्वारा उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और अपमानजनक टिप्पणी की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉक्टर ने उनसे कहा कि वे सरकारी अस्पताल क्यों नहीं जाते और क्या उनकी मां का इलाज मुफ्त में किया जाए।
परिजनों का दावा है कि अस्पतालों के बीच इलाज के लिए भटकने के दौरान उनकी मां की मौत हो गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
अब पीड़ित बेटे ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित अस्पताल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
सवाल यह है कि क्या मरीज को समय पर उचित इलाज मिला? क्या इलाज के दौरान जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया? और अगर शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
फिलहाल, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। मामले में संबंधित अस्पतालों और डॉक्टरों का पक्ष सामने आना तथा पुलिस जांच की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
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