नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने व नगर की स्वच्छता के लिए वर्ष 2018 में स्वीकृत 45 करोड़ रुपए का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट सिस्टम की सुस्ती की भेंट चढ़ गया है। हैरानी की बात यह है कि जिस काम को महज 18 माह में पूरा करने का अनुबंध था, वह 8 साल बाद भी अधूरा है।