भगवान शिव व्यसनी नहीं बल्कि शाश्वत और सात्विक स्वरूप हैं। समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान शिव ने विष पान किया, तब उससे हुई जलन को शांत करने के लिए उनके शरीर पर विजया यानी भांग का लेपन किया गया था, क्योंकि भांग की तासीर ठंडी होती है। लेकिन अज्ञानता के कारण आज हमने शिव को भांग पीने वाला मान लिया है। उक्त विचार कथा वाचक शुभम् कृष्ण दुबे ने श्रीमद् भागवत ज्ञान गंग