मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने और स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के उद्देश्य से मध्यान्ह भोजन योजना पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते बच्चों को पौष्टिक भोजन के बजाय खराब और कीड़े लगे चावल परोसे जा रहे हैं।