अन्नदाता सड़क पर है, सरकार प्रचार में व्यस्त है। अगर किसानों की फसल की उचित कीमत और MSP पर 100% खरीदी सुनिश्चित नहीं कर सकते, तो सत्ता में रहने का दावा भी छोड़ देना चाहिए।
भोपाल की सड़कों पर उतरे किसान किसी एहसान की नहीं, अपने हक़ की मांग कर रहे हैं। लोकतंत्र में आवाज़ दबाने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं।
किसानों को उनका हक़ दो, सिर्फ़ आश्वासन नहीं