सांगोद. जिस धरती को हमारी संस्कृति में गौमाता का आश्रय कहा जाता है, वही आज अतिक्रमण की मार झेल रही है। तहसील कनवास की ग्राम देवली स्थित चारागाह भूमि पर वर्षों से संचालित गौशाला आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। चारों ओर बढ़ते अवैध कब्जों ने गौमाता के लिए खुले आकाश तले सांस लेने की जगह तक छीन ली है। गौशाला में रह रही गायें आज न बोल सकती हैं, न विरोध कर सकती।