अबली मीणी का महल, कोटा-
( हाड़ौती का ताजमहल )
कोटा के प्रसिद्ध नेशनल पार्क "मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व" में दरा की एक पहाड़ी पर स्थित एक महल इतिहास की एक अनूठी प्रेम कहानी का साक्षी बनकर खड़ा है।
इतिहासविदों के अनुसार -
अबली मीणी खूबसूरती की मिसाल थी, ऐसी सुंदरता राव मुकुंद सिंह हाड़ा ने पहल कभी नहीं देखी थी।
दोनों के प्रेम के चर्चे हाड़ौती के गांवों की चौपालों पर यदाकदा सुनाई देते रहते हैं।
इसका उल्लेख इतिहासकार जनरल सर कनिंघम ने भी अपनी किताब “रिपोर्ट ऑफ इंडियन आर्कियोलोजिकल सर्वे” में किया है। इस किताब के अनुसार कोटा के महाराव मुकुंदसिंह ने अपनी प्रेयसी अबली मीणी के लिए दरा के सुरम्य जंगल में इस महल का निर्माण करवाया था।अबली मीणा जीवनभर मुकुन्द सिंह की पासवान बनकर रही। राव मुकुंदसिंह (सन 1649 - 1657)कोटा के संस्थापक माधोसिंह के पुत्र थे।
इस तरह हुए थे महाराव मोहित-
राव मुकुंदसिंह अक्सर दरा के जंगल में शिकार खेलने आया करते थे। एक बार जब वे यहां शिकार खेलने आए तो उन्होंने जंगल के बीच सुंदर महिला को देखा। जिसके सिर पर पानी से भरे दो घड़े रखे थे और वह लड़ते हुए दो सांडों के सिंग अपने हाथों से पकड़कर अलग कर रही थी। राजा मुकुंद न केवल इस दृश्य को देख कर चकित रह गए और उस सुंदर महिला पर मोहित हो गए।
यह वीरांगना ही खैराबाद की अबली मीणा थी। अबली पर मोहित राव मुकुंद उसे हर कीमत पर पाना चाहते थे और उन्होंने अबली के समक्ष प्रेम का प्रस्ताव रखा। अबली ने भी मुकुंद के प्रेम को स्वीकार कर लिया। साथ ही अबली ने यह शर्त रखी कि उसके लिए उसी स्थान पर महल बनाया जाए, जहां वो पहली बार मिले थे। वहीं महल में रोज रात को एक दीपक ऐसे स्थान पर जलाया जाए, कि उस दीपक की रोशनी अबली के गांव खैराबाद तक दिखे। राव मुकुंद ने अबली की शर्त के अनुसार दरा के जंगल में ही इस महल का निर्माण करवाया। जिसे आज भी अबली के नाम पर अबली मीणी के महल के रूप में जाना जाता है
विवाहित थी अबली, पति को मिली थी जागीर-
कहा जाता है कि अबली शादीशुदा थी। एक रात को अबली के पति ने राव मुकुंद पर छुर्रे से जानलेवा हमला कर दिया था। जिसे सुरक्षाकर्मियों ने नाकाम कर दिया। राव मुकुंद ने अबली के पति को खुश करने के लिए उसे दरा घाटी की जागीर दे दी। साथ ही यह हक भी दिया कि जो भी इस मार्ग से गुजरे, उससे अबली का पति शुल्क वसूल करे।
Ladpura, Kota | Jul 23, 2026