क्या आप जानते हैं, गढ़वाली चौहान थे श्री हेमकुंड साहिब के पहले ग्रंथी?
विश्व प्रसिद्ध श्री हेमकुंड साहिब के प्रथम ग्रंथी के रूप में भाई नंदा सिंह चौहान का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। वे चमोली जिले की पुलना-भ्यूंडार घाटी से जुड़े थे और हेमकुंड साहिब की खोज, स्थापना एवं प्रारंभिक सेवा कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जब संत सोहन सिंह जी ने गुरु गोबिंद सिंह जी की तपस्थली हेमकुंड साहिब की खोज का अभियान शुरू किया, तब स्थानीय लोगों ने भी इस पवित्र कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 1935-36 में गुरुद्वारे के प्रारंभिक निर्माण और वहां गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाश की व्यवस्था में भाई नंदा सिंह चौहान अग्रणी सहयोगियों में शामिल रहे।
दुर्गम हिमालयी परिस्थितियों, बर्फबारी और कठिन यात्रा मार्ग के बावजूद उन्होंने वर्षों तक निस्वार्थ भाव से सेवा की। हेमकुंड साहिब के इतिहास में उनका नाम श्रद्धा, समर्पण और सेवा के प्रतीक के रूप में दर्ज है। देवभूमि उत्तराखंड की यह विरासत बताती है कि हेमकुंड साहिब की स्थापना और पहचान में स्थानीय लोगों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा है।
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Dehradun, Dehradun | Jun 24, 2026