तुम्हारे घर में दरवाज़ा है लेकिन तुम्हें ख़तरे का अंदाज़ा नहीं है ।
हमें ख़तरे का अंदाज़ा है लेकिन हमारे घर में दरवाज़ा नहीं है।
~ श्री नसीमुदीन सिद्दीकी जी
तुम्हारे घर में दरवाज़ा है लेकिन तुम्हें ख़तरे का अंदाज़ा नहीं है ।
हमें ख़तरे का अंदाज़ा है लेकिन हमारे घर में दरवाज़ा नहीं है।
~ श्री नसीमुदीन सिद्दीकी जी - Sadar News