रात का सन्नाटा था, सड़क किनारे झाड़ियाँ अंधेरे में गुम थीं और एक घायल इंसान दर्द से तड़प रहा था। उसी वक्त सिरदला पुलिस की 112 टीम—जिसमें केवल दो लोग थे, एक महिला सिपाही और एक ड्राइवर—मानवता की आख़िरी उम्मीद बनकर पहुँची। महिला सिपाही (104) अस्तुरन देवी और ड्राइवर खुर्शीद आलम ने उस पल वर्दी से पहले इंसान होना चुना। घटना का समय रविवार रात 9 बजे ।