Public App Logo
Jansamasya
News
Bjp
National
Police
Bihar
India
कांग्रेस
भाजपा
Congress
Modi
Delhi
Viral
Crime
Jharkhand
Up
Bollywood
दिल्ली
Breakingnews
महिला
Narendramodi
Nitishkumar
Madhya_pradesh
सोशल_मीडिया
Madhyapradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
Ipl
Uttarpradesh
Haryana
No video available

जय हिंद जय भारत 26 जनवरी गड़तंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Sagar Nagar, Sagar | Jan 26, 2022

MORE NEWS

➡️ बीना में जैविक हाट बाजार के 6 माह पूरे

➡️ किसानों और शहरवासियों में बढ़ा जैविक सब्जियों का उत्साह

बीना विकासखंड में निरंतर आयोजित हो रहा साप्ताहिक जैविक हाट बाजार आज सफलता की नई मिसाल बन चुका है। पिछले 6 महीनों से लगातार चल रहे इस बाजार ने किसानों और शहरवासियों दोनों के बीच विशेष पहचान बनाई है। 

शुरुआत में इस जैविक हाट बाजार से केवल 12 किसान जुड़े थे, जो अपनी जैविक सब्जियां और कृषि उत्पाद लेकर आते थे। आज यह संख्या बढ़कर 16 किसानों तक पहुंच गई है। हर रविवार सुबह 7 बजे से बाजार शुरू हो जाता है। गर्मी के मौसम में भी शहरवासी बड़ी उत्सुकता से जैविक सब्जियों की खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। 

बाजार में टमाटर, ककड़ी, गिलकी, लौकी, पालक, पुदीना, धनिया, चुकंदर, नींबू जैसी ताजी जैविक सब्जियों के साथ अंजीर, आम, बेल, पपीता जैसे फल भी उपलब्ध रहते हैं। खास बात यह है कि मात्र दो से तीन घंटों के भीतर किसानों के अधिकांश उत्पाद बिक जाते हैं। 

जैविक हाट बाजार से जुड़े किसानों का कहना है कि अब उनकी आय में वृद्धि हो रही है और लोगों का भरोसा भी जैविक खेती की ओर बढ़ा है। वहीं शहरवासियों का कहना है कि इस बाजार से उन्हें ताजी, सुरक्षित और रसायन मुक्त सब्जियां मिल रही हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ हो रहा है। कई लोगों ने इच्छा जताई कि ऐसा जैविक बाजार प्रतिदिन लगे ताकि उन्हें रोज ताजी जैविक सब्जियां मिल सकें। 

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय ने बताया कि किसानों में धीरे-धीरे जैविक खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है और बीना शहर के लोग भी इस हाट बाजार का बेसब्री से इंतजार करते हैं। यह बाजार न केवल किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि स्वस्थ समाज और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल साबित हो रहा है।

CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

➡️ बीना में जैविक हाट बाजार के 6 माह पूरे ➡️ किसानों और शहरवासियों में बढ़ा जैविक सब्जियों का उत्साह बीना विकासखंड में निरंतर आयोजित हो रहा साप्ताहिक जैविक हाट बाजार आज सफलता की नई मिसाल बन चुका है। पिछले 6 महीनों से लगातार चल रहे इस बाजार ने किसानों और शहरवासियों दोनों के बीच विशेष पहचान बनाई है। शुरुआत में इस जैविक हाट बाजार से केवल 12 किसान जुड़े थे, जो अपनी जैविक सब्जियां और कृषि उत्पाद लेकर आते थे। आज यह संख्या बढ़कर 16 किसानों तक पहुंच गई है। हर रविवार सुबह 7 बजे से बाजार शुरू हो जाता है। गर्मी के मौसम में भी शहरवासी बड़ी उत्सुकता से जैविक सब्जियों की खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। बाजार में टमाटर, ककड़ी, गिलकी, लौकी, पालक, पुदीना, धनिया, चुकंदर, नींबू जैसी ताजी जैविक सब्जियों के साथ अंजीर, आम, बेल, पपीता जैसे फल भी उपलब्ध रहते हैं। खास बात यह है कि मात्र दो से तीन घंटों के भीतर किसानों के अधिकांश उत्पाद बिक जाते हैं। जैविक हाट बाजार से जुड़े किसानों का कहना है कि अब उनकी आय में वृद्धि हो रही है और लोगों का भरोसा भी जैविक खेती की ओर बढ़ा है। वहीं शहरवासियों का कहना है कि इस बाजार से उन्हें ताजी, सुरक्षित और रसायन मुक्त सब्जियां मिल रही हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ हो रहा है। कई लोगों ने इच्छा जताई कि ऐसा जैविक बाजार प्रतिदिन लगे ताकि उन्हें रोज ताजी जैविक सब्जियां मिल सकें। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय ने बताया कि किसानों में धीरे-धीरे जैविक खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है और बीना शहर के लोग भी इस हाट बाजार का बेसब्री से इंतजार करते हैं। यह बाजार न केवल किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि स्वस्थ समाज और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल साबित हो रहा है। CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

Sagar, Madhya Pradesh | Jun 7, 2026

शराब के नशे में हंगामा कर रहे दो युवक गिरफ्तार#smartmpnews #sagar #news #shorts

शराब के नशे में हंगामा कर रहे दो युवक गिरफ्तार#smartmpnews #sagar #news #shorts

Sagar Nagar, Sagar | Jun 7, 2026

➡️ ऊँची पहाड़ियों एवं पथरीली बंजर भूमि को हरित बनाना समय की आवश्यकता

वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट तथा भूमि क्षरण जैसी समस्याएँ दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही हैं। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई तथा प्राकृतिक वन क्षेत्रों में कमी के कारण वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है और ऑक्सीजन की उपलब्धता घटती जा रही है। परिणामस्वरूप तापमान में वृद्धि, सूखा, बाढ़, वर्षा का असंतुलित वितरण तथा कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार एक विकसित वृक्ष प्रतिवर्ष लगभग 100 से 120 किलोग्राम ऑक्सीजन वातावरण में छोड़ता है तथा बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मध्य प्रदेश तथा बुंदेलखंड क्षेत्र में बड़ी मात्रा में ऊँची पहाड़ियाँ, पथरीली भूमि एवं बंजर ढालें उपलब्ध हैं। इन क्षेत्रों में होने वाली वर्षा का अधिकांश जल बहकर नालों, नदियों और अंततः समुद्र तक पहुँच जाता है। इसके साथ उपजाऊ मिट्टी का भी कटाव होता है, जिससे भूमि की उत्पादकता कम होती जाती है। यदि इन बंजर पहाड़ियों पर जल संरक्षण संरचनाओं के साथ उपयुक्त वृक्षों एवं झाड़ियों का रोपण किया जाए तो न केवल भूमि का संरक्षण होगा बल्कि पर्यावरण सुधार, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण तथा ग्रामीण आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा।

ऐसे क्षेत्रों में खेजड़ी (Prosopis cineraria), करंज (Pongamia pinnata), देशी बबूल (Vachellia nilotica), कुमठा या गोंद बबूल (Acacia senegal), कैर या करील (Capparis decidua), सीताफल (Annona squamosa), बेर (Ziziphus mauritiana), अगावे (Agave sisalana), नागफनी (Opuntia ficus-indica) तथा थोर (Euphorbia caducifolia) जैसी प्रजातियाँ अत्यंत उपयुक्त पाई गई हैं। 

खेजड़ी, जिसे शमी एवं जांटी के नाम से भी जाना जाता है, अत्यधिक सूखा सहनशील वृक्ष है तथा इसकी सांगरी फलियाँ आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं। करंज भूमि में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर उर्वरता बढ़ाता है तथा इसके बीजों से तेल प्राप्त होता है। कुमठा से उच्च गुणवत्ता का गोंद प्राप्त होता है जबकि कैर एक कांटेदार झाड़ी है जो बकरियों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है तथा इसके फल अचार निर्माण में उपयोग किए जाते हैं। सीताफल एवं बेर पथरीली भूमि में सफल फलदार प्रजातियाँ हैं। वहीं अगावे, नागफनी एवं थोर मिट्टी कटाव रोकने, जीवित बाड़ बनाने तथा अत्यंत कम पानी में जीवित रहने के लिए प्रसिद्ध हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए कंटूर आधारित अर्धचंद्राकार संरचनाएँ अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती हैं। इन संरचनाओं को ढाल की समान ऊँचाई अर्थात कंटूर रेखा पर बनाया जाता है। सामान्यतः इनका व्यास 1 से 1.5 मीटर तथा गहराई 20 से 30 सेंटीमीटर रखी जाती है। अर्धचंद्राकार संरचना का खुला भाग पहाड़ी के ऊपरी हिस्से की ओर रखा जाता है ताकि वर्षा का बहता हुआ पानी उसमें एकत्र होकर धीरे-धीरे भूमि में समा सके। अधिक ढाल वाले क्षेत्रों में 45 से 60 सेंटीमीटर चौड़ी तथा 30 से 45 सेंटीमीटर गहरी कंटूर ट्रेंच भी बनाई जा सकती हैं। इन संरचनाओं से जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण तथा पौधों की जीवित रहने की संभावना में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

पौधारोपण के लिए जून से अगस्त के मध्य प्रथम अच्छी वर्षा के बाद 45 × 45 × 45 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे तैयार किए जाने चाहिए। अत्यधिक पथरीली भूमि में 60 × 60 × 60 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे अधिक उपयुक्त रहते हैं। प्रत्येक गड्ढे में 5 से 10 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर खाद मिलाई जानी चाहिए तथा 45 से 90 सेंटीमीटर ऊँचाई के स्वस्थ पौधों का रोपण करना चाहिए। जहाँ पौधे उपलब्ध न हों वहाँ सीधे बीजों की बुवाई भी की जा सकती है। खेजड़ी, करंज, बबूल, कुमठा, कैर तथा बेर के दो से तीन बीज तथा सीताफल के तीन से चार बीज प्रति गड्ढा डाले जा सकते हैं। अंकुरण के बाद सबसे स्वस्थ पौधे को सुरक्षित रखते हुए अन्य पौधों को निकालकर दूसरे स्थानों पर प्रतिरोपित किया जा सकता है। भविष्य में परिपक्व वृक्षों से प्राप्त बीजों का उपयोग नए क्षेत्रों में वृक्षारोपण के लिए भी किया जा सकता है। जहां पर गधों में वृक्ष लगाया जा रहा हूं वहां पर उपरोक्त प्रजातियों के दो दो तीन-तीन बी भी लगा देना चाहिए जिससे वह सरवाइव कर जाए तो उनमें से एक या दो को छोड़कर के बाकी को निकाल देना चाहिए। यह तकनीकी उन स्थानो के लिए उपयुक्त है जहां ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों पर बकरियां आदि से पौधे से बचाव हो जाए और जहां पर सिंचाई सुविधा ना हो तथा केवल वर्षा ऋतु पर आधारित हरा-भरा पहाड़ी बनाना हो। 

व्यावहारिक रूप से मिश्रित वृक्षारोपण मॉडल अधिक सफल पाया गया है। इसके अंतर्गत लगभग 40 प्रतिशत खेजड़ी, 20 प्रतिशत करंज, 15 प्रतिशत बबूल, 10 प्रतिशत कुमठा, 5 प्रतिशत कैर, 5 प्रतिशत सीताफल तथा 5 प्रतिशत बेर का रोपण किया जा सकता है। ढालों, मेड़ों एवं कटावग्रस्त भागों पर अगावे, नागफनी तथा थोर का रोपण विशेष रूप से लाभकारी रहता है।

यदि ग्राम पंचायतें, वन समितियाँ, स्वयंसेवी संस्थाएँ, किसान समूह तथा स्थानीय समुदाय मिलकर इस प्रकार के वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण अभियान चलाएँ तो आने वाले वर्षों में पहाड़ियाँ पुनः हरी-भरी हो सकती हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, भूमि सुधार, जैव विविधता संवर्धन, पशुओं के लिए चारा उपलब्धता, ग्रामीण रोजगार सृजन तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। वास्तव में ऊँची पहाड़ियों एवं पथरीली बंजर भूमि को हरित बनाना केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित एवं समृद्ध भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है।

डॉ. के. एस. यादव, प्रमुख वैज्ञानिक एवं प्रमुख
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय।
कृषि विज्ञान केंद्र, सागर (म.प्र.)

CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

➡️ ऊँची पहाड़ियों एवं पथरीली बंजर भूमि को हरित बनाना समय की आवश्यकता वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट तथा भूमि क्षरण जैसी समस्याएँ दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही हैं। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई तथा प्राकृतिक वन क्षेत्रों में कमी के कारण वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है और ऑक्सीजन की उपलब्धता घटती जा रही है। परिणामस्वरूप तापमान में वृद्धि, सूखा, बाढ़, वर्षा का असंतुलित वितरण तथा कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार एक विकसित वृक्ष प्रतिवर्ष लगभग 100 से 120 किलोग्राम ऑक्सीजन वातावरण में छोड़ता है तथा बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मध्य प्रदेश तथा बुंदेलखंड क्षेत्र में बड़ी मात्रा में ऊँची पहाड़ियाँ, पथरीली भूमि एवं बंजर ढालें उपलब्ध हैं। इन क्षेत्रों में होने वाली वर्षा का अधिकांश जल बहकर नालों, नदियों और अंततः समुद्र तक पहुँच जाता है। इसके साथ उपजाऊ मिट्टी का भी कटाव होता है, जिससे भूमि की उत्पादकता कम होती जाती है। यदि इन बंजर पहाड़ियों पर जल संरक्षण संरचनाओं के साथ उपयुक्त वृक्षों एवं झाड़ियों का रोपण किया जाए तो न केवल भूमि का संरक्षण होगा बल्कि पर्यावरण सुधार, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण तथा ग्रामीण आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा। ऐसे क्षेत्रों में खेजड़ी (Prosopis cineraria), करंज (Pongamia pinnata), देशी बबूल (Vachellia nilotica), कुमठा या गोंद बबूल (Acacia senegal), कैर या करील (Capparis decidua), सीताफल (Annona squamosa), बेर (Ziziphus mauritiana), अगावे (Agave sisalana), नागफनी (Opuntia ficus-indica) तथा थोर (Euphorbia caducifolia) जैसी प्रजातियाँ अत्यंत उपयुक्त पाई गई हैं। खेजड़ी, जिसे शमी एवं जांटी के नाम से भी जाना जाता है, अत्यधिक सूखा सहनशील वृक्ष है तथा इसकी सांगरी फलियाँ आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं। करंज भूमि में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर उर्वरता बढ़ाता है तथा इसके बीजों से तेल प्राप्त होता है। कुमठा से उच्च गुणवत्ता का गोंद प्राप्त होता है जबकि कैर एक कांटेदार झाड़ी है जो बकरियों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है तथा इसके फल अचार निर्माण में उपयोग किए जाते हैं। सीताफल एवं बेर पथरीली भूमि में सफल फलदार प्रजातियाँ हैं। वहीं अगावे, नागफनी एवं थोर मिट्टी कटाव रोकने, जीवित बाड़ बनाने तथा अत्यंत कम पानी में जीवित रहने के लिए प्रसिद्ध हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए कंटूर आधारित अर्धचंद्राकार संरचनाएँ अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती हैं। इन संरचनाओं को ढाल की समान ऊँचाई अर्थात कंटूर रेखा पर बनाया जाता है। सामान्यतः इनका व्यास 1 से 1.5 मीटर तथा गहराई 20 से 30 सेंटीमीटर रखी जाती है। अर्धचंद्राकार संरचना का खुला भाग पहाड़ी के ऊपरी हिस्से की ओर रखा जाता है ताकि वर्षा का बहता हुआ पानी उसमें एकत्र होकर धीरे-धीरे भूमि में समा सके। अधिक ढाल वाले क्षेत्रों में 45 से 60 सेंटीमीटर चौड़ी तथा 30 से 45 सेंटीमीटर गहरी कंटूर ट्रेंच भी बनाई जा सकती हैं। इन संरचनाओं से जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण तथा पौधों की जीवित रहने की संभावना में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। पौधारोपण के लिए जून से अगस्त के मध्य प्रथम अच्छी वर्षा के बाद 45 × 45 × 45 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे तैयार किए जाने चाहिए। अत्यधिक पथरीली भूमि में 60 × 60 × 60 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे अधिक उपयुक्त रहते हैं। प्रत्येक गड्ढे में 5 से 10 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर खाद मिलाई जानी चाहिए तथा 45 से 90 सेंटीमीटर ऊँचाई के स्वस्थ पौधों का रोपण करना चाहिए। जहाँ पौधे उपलब्ध न हों वहाँ सीधे बीजों की बुवाई भी की जा सकती है। खेजड़ी, करंज, बबूल, कुमठा, कैर तथा बेर के दो से तीन बीज तथा सीताफल के तीन से चार बीज प्रति गड्ढा डाले जा सकते हैं। अंकुरण के बाद सबसे स्वस्थ पौधे को सुरक्षित रखते हुए अन्य पौधों को निकालकर दूसरे स्थानों पर प्रतिरोपित किया जा सकता है। भविष्य में परिपक्व वृक्षों से प्राप्त बीजों का उपयोग नए क्षेत्रों में वृक्षारोपण के लिए भी किया जा सकता है। जहां पर गधों में वृक्ष लगाया जा रहा हूं वहां पर उपरोक्त प्रजातियों के दो दो तीन-तीन बी भी लगा देना चाहिए जिससे वह सरवाइव कर जाए तो उनमें से एक या दो को छोड़कर के बाकी को निकाल देना चाहिए। यह तकनीकी उन स्थानो के लिए उपयुक्त है जहां ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों पर बकरियां आदि से पौधे से बचाव हो जाए और जहां पर सिंचाई सुविधा ना हो तथा केवल वर्षा ऋतु पर आधारित हरा-भरा पहाड़ी बनाना हो। व्यावहारिक रूप से मिश्रित वृक्षारोपण मॉडल अधिक सफल पाया गया है। इसके अंतर्गत लगभग 40 प्रतिशत खेजड़ी, 20 प्रतिशत करंज, 15 प्रतिशत बबूल, 10 प्रतिशत कुमठा, 5 प्रतिशत कैर, 5 प्रतिशत सीताफल तथा 5 प्रतिशत बेर का रोपण किया जा सकता है। ढालों, मेड़ों एवं कटावग्रस्त भागों पर अगावे, नागफनी तथा थोर का रोपण विशेष रूप से लाभकारी रहता है। यदि ग्राम पंचायतें, वन समितियाँ, स्वयंसेवी संस्थाएँ, किसान समूह तथा स्थानीय समुदाय मिलकर इस प्रकार के वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण अभियान चलाएँ तो आने वाले वर्षों में पहाड़ियाँ पुनः हरी-भरी हो सकती हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, भूमि सुधार, जैव विविधता संवर्धन, पशुओं के लिए चारा उपलब्धता, ग्रामीण रोजगार सृजन तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। वास्तव में ऊँची पहाड़ियों एवं पथरीली बंजर भूमि को हरित बनाना केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित एवं समृद्ध भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है। डॉ. के. एस. यादव, प्रमुख वैज्ञानिक एवं प्रमुख जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय। कृषि विज्ञान केंद्र, सागर (म.प्र.) CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

Sagar, Madhya Pradesh | Jun 6, 2026

➡️ एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत जिले के विभिन्न विकासखंडों में हुआ पौधारोपण 
 
➡️ पर्यावरण संरक्षण के लिए लिया संकल्प  

एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत जन अभियान परिषद की टीम द्वारा जिले के विभिन्न विकासखंडों में पौधारोपण किया गया। पौधारोपण के दौरान टीम ने लगाए गए पौधों की रक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु संकल्प लिया। 

अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृ शक्ति के सम्मान को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के सदस्य, स्थानीय नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

➡️ एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत जिले के विभिन्न विकासखंडों में हुआ पौधारोपण ➡️ पर्यावरण संरक्षण के लिए लिया संकल्प एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत जन अभियान परिषद की टीम द्वारा जिले के विभिन्न विकासखंडों में पौधारोपण किया गया। पौधारोपण के दौरान टीम ने लगाए गए पौधों की रक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु संकल्प लिया। अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृ शक्ति के सम्मान को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के सदस्य, स्थानीय नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

Sagar, Madhya Pradesh | Jun 6, 2026

➡️ विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर म प्र जन अभियान परिषद की नवांकुर संस्था ए.व्ही.एस. शिक्षा एवं समाजोत्थान समिति द्वारा संचालित दयोदय गोशाला, में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारियों, समाजसेवियों एवं गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर उपस्थित समिति पदाधिकारी श्री सुबोध सतभैया वकील साहब, अनिल जैन शिक्षक , रवि कुमार जैन सीपुर, प्रवीण चौधरी कैलाश चंद बजाज दीपक जैन, समिति के विद्यालय के प्राचार्य श्री आनंद कुमार जैन, विनय सेन, लखन तिवारी, संतोष चढ़ार, वैजनाथ चढ़ार, श्रीराम पटेल, काशीराम पटेल एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

अतिथियों ने पौधे रोपकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया तथा लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने तथा हर वर्ष पौधारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया। अंत में समिति की ओर से सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।

CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

➡️ विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर म प्र जन अभियान परिषद की नवांकुर संस्था ए.व्ही.एस. शिक्षा एवं समाजोत्थान समिति द्वारा संचालित दयोदय गोशाला, में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारियों, समाजसेवियों एवं गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर उपस्थित समिति पदाधिकारी श्री सुबोध सतभैया वकील साहब, अनिल जैन शिक्षक , रवि कुमार जैन सीपुर, प्रवीण चौधरी कैलाश चंद बजाज दीपक जैन, समिति के विद्यालय के प्राचार्य श्री आनंद कुमार जैन, विनय सेन, लखन तिवारी, संतोष चढ़ार, वैजनाथ चढ़ार, श्रीराम पटेल, काशीराम पटेल एवं अन्य लोग उपस्थित रहे। अतिथियों ने पौधे रोपकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया तथा लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने तथा हर वर्ष पौधारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया। अंत में समिति की ओर से सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar

Sagar, Madhya Pradesh | Jun 6, 2026