#आज_का_सुविचार
निराशा के क्षणों में प्रतीक्षा
इस प्रकार है जैसे अंधे को लाठी का सहारा मिलना।
- मुंशी प्रेमचंद - Uttar Pradesh News
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निराशा के क्षणों में प्रतीक्षा
इस प्रकार है जैसे अंधे को लाठी का सहारा मिलना।
- मुंशी प्रेमचंद