
एमपी में UCC लागू करने की तैयारी, विवाह, लिव-इन और महिलाओं के अधिकारों में होंगे बड़े बदलाव
मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब UCC विधेयक विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। सदन में चर्चा, संभावित संशोधन और पारित होने के बाद ही यह कानून लागू होगा।
सरकार का कहना है कि UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को वैध संतान का दर्जा मिलेगा। उन्हें शिक्षा, भरण-पोषण और अन्य कानूनी अधिकारों से केवल माता-पिता के रिश्ते की वजह से वंचित नहीं रखा जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि UCC लागू होने से किसी भी धर्म की विवाह परंपराएं समाप्त नहीं होंगी। हिंदू विवाह के सात फेरे, मुस्लिम निकाह, सिख आनंद कारज और अन्य धार्मिक रीति-रिवाज पहले की तरह जारी रहेंगे। यह कानून केवल विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े नागरिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं को समान बनाने पर केंद्रित होगा।
कमेटी ने अनुसूचित जनजातियों (ST), घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। संविधान के विशेष संरक्षण को देखते हुए उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों को यथावत रखने का प्रस्ताव है।
सरकार ने बताया कि UCC की अवधारणा को सुप्रीम कोर्ट के 1995 के सरला मुद्गल फैसले सहित कई न्यायिक टिप्पणियों से बल मिला है, जिनमें समान नागरिक संहिता पर विचार करने की आवश्यकता जताई गई थी।
यदि विधानसभा से विधेयक पारित हो जाता है तो मध्य प्रदेश UCC लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन सकता है। इसके बाद विवाह, तलाक, बहुविवाह, महिलाओं के अधिकार, बच्चों की कानूनी स्थिति और पारिवारिक कानूनों में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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