प्रस्ताव के अनुसार उदयपुर, जयपुर, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर, सीकर और बांसवाड़ा जैसी बड़ी लोकसभा सीटों को तीन-तीन हिस्सों में विभाजित करने का सुझाव दिया गया है, जबकि भरतपुर सीट को दो भागों में बांटकर नई सीट बनाने की बात कही गई है। साथ ही 18 लोकसभा सीटों को यथावत रखने का भी प्रस्ताव बताया गया है।
यदि परिसीमन आयोग भविष्य में इस प्रकार का निर्णय लेता है, तो उदयपुर संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं, विधानसभा क्षेत्रों और राजनीतिक समीकरणों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह केवल प्रस्तावित सुझाव है। अंतिम निर्णय परिसीमन आयोग और केंद्र सरकार की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।