निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मजारों पर माथा टेकने वाले, हर मंच से यह कहने वाले कि “थारी बगा, जेथ कैथ भी जरूरत पड़ी हूं माथो देण नै तैयार”, बिशाला प्रकरण में जाट युवक पर हमले के बाद मुस्लिम परिवार पर हुई जेसीबी कार्रवाई के विरोध में आवाज उठाने वाले, गले में अज़रख पहनकर थार के आपसी भाईचारे और सौहार्द की बातें करने वाले युवा नेता क्या इस मुद्दे पर भी अपनी कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया देंगे?
या फिर अल्पसंख्यक भाइयों को केवल चुनाव और वोटों के समय ही याद किया जाएगा? क्या आज की इस कठिन घड़ी में उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा और उनके पक्ष में आवाज उठाने की जिम्मेदारी केवल फतेह खान, अमीन खान और हरिश चौधरी जैसे नेताओं पर ही छोड़ दी जाएगी?
Barmer, Barmer | Jun 18, 2026