
संघर्ष से सत्ता तक: चातुरी नंद की कहानी
गरीबी, सामाजिक भेदभाव और चुनौतियों से लड़कर बनीं सरायपाली की विधायक
कभी रंग और जातिगत भेदभाव को लेकर ताने सुनने वाली चातुरी नंद ने अपने संघर्ष, शिक्षा और मेहनत के दम पर राजनीति में एक अलग पहचान बनाई। जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने हार मानने के बजाय आगे बढ़ने का रास्ता चुना।
गरीबी और सामाजिक भेदभाव की चुनौतियों के बीच उन्होंने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। शिक्षक के रूप में नौकरी हासिल की और समाज के बीच अपनी पहचान बनाई। उनका सफर इस बात की मिसाल है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद मेहनत और दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ा जा सकता है।
शिक्षक से विधायक बनने तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। राजनीति में कदम रखने के बाद उन्होंने जनता के बीच अपनी जगह बनाई और वर्ष 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सरायपाली विधानसभा सीट से जीत दर्ज की।
इस चुनाव में उन्होंने भाजपा की उम्मीदवार सरला कोसरिया को हराया। चुनाव परिणाम ने उन्हें छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई पहचान दिलाई।
आज चातुरी नंद की कहानी संघर्ष, शिक्षा और राजनीतिक सफर के संदर्भ में चर्चा का विषय है। उनका जीवन उन लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो गरीबी और सामाजिक भेदभाव जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
एक समय की चुनौतियों से निकलकर विधानसभा तक पहुंचने का सफर—चातुरी नंद की पहचान उनकी संघर्ष यात्रा है।
📺 SHRIRAJ NEWS | छत्तीसगढ़
#चातुरीनंद #सरायपालीविधायक #छत्तीसगढ़राजनीति #कांग्रेस #संघर्षकीकहानी महिलानेतृत्व ShrirajNews
Raipur, Raipur | Oct 21, 2026