
Datia News :मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भाजपा की ओर से आशुतोष तिवारी का नाम घोषित होने के बाद जमकर बवाल मचा हुआ है। 36 साल से सीट पर जमे हुए नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों में भारी आक्रोश है। शनिवार सुबह से हालात ये हैं कि, हुड़दंग करने वालों ने शहर के बाजार बंद करा दिए हैं। वहीं, सामान्य गाड़ियों के साथ - साथ पुलिस वाहन में भी तोड़फोड़ की गई है। फिलहाल, जिले के बड़े इलाके में हालात तनावपूर्ण हैं। फिलहाल, गौर करें साल 2023 के विधानसभा चुनाव पर तो दतिया विधानसभा सीट पर भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस के राजेंद्र भारती के बीच मुकाबला था। अगर बूथ - दर - बूथ देखें तो वो मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा था। देखें कैसे वोट ज्यादा मिलने के बाद भी नरोत्तम चुनाव हार गए थे।
बूथवार मतदान के आंकड़े बताते हैं कि, भाजपा प्रत्याशी डॉ. नरोत्तम मिश्रा 135 मतदान केंद्रों पर आगे रहे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती 122 बूथों पर बढ़त बना पाए। इसके बावजूद अंतिम मतगणना में राजेंद्र भारती ने चुनाव जीत लिया। ये परिणाम इस बात का उदाहरण है कि, सिर्फ अधिक बूथ जीतना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रत्येक बूथ पर मिले मतों का अंतर अंतिम नतीजे को तय करता है।
बूथवार विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि, कई मतदान केंद्रों पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को बेहद कम अंतर से बढ़त मिली, जबकि राजेंद्र भारती ने जिन बूथों पर जीत दर्ज की, उनमें कई जगह बड़ा मतांतर हासिल किया। यही बढ़त अंतत पूरे विधानसभा क्षेत्र के परिणाम में निर्णायक साबित हुई। वहीं कई मतदान केंद्र ऐसे भी रहे, जहां जीत-हार का फैसला एक-दो वोट से हुआ।
बूथवार विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि, कई मतदान केंद्रों पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को बेहद कम अंतर से बढ़त मिली, जबकि राजेंद्र भारती ने जिन बूथों पर जीत दर्ज की, उनमें कई जगह बड़ा मतांतर हासिल किया। यही बढ़त अंतत पूरे विधानसभा क्षेत्र के परिणाम में निर्णायक साबित हुई। वहीं कई मतदान केंद्र ऐसे भी रहे, जहां जीत-हार का फैसला एक-दो वोट से हुआ।
दतिया विधानसभा का यह चुनाव इस मायने में भी खास रहा कि बूथों की संख्या में बढ़त और अंतिम जीत एक-दूसरे से अलग दिखाई दी। आंकड़े बताते हैं कि, चुनावी रणनीति में सिर्फ बूथ जीतना ही नहीं, बल्कि हर बूथ पर अधिकतम मतों का अंतर हासिल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यही कारण रहा कि, बूथवार मुकाबला बेहद रोचक रहने के बावजूद अंतिम परिणाम राजेंद्र भारती के पक्ष में गया था।