सिर्फ गाली देने से नहीं लगेगा SC/ST एक्ट, जाति के आधार पर अपमान की मंशा जरूरी: सुप्रीम कोर्ट पटना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए शीर्ष अदालत ने एफआईआर में इरादे की कमी को बताया अहम सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल गाली-गलौज या अपशब्दों के प्रयोग मात्र से SC/ST एक्ट लागू नहीं होगा। इसके लिए यह साबित होना आवश्यक है कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा थी। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि संबंधित मामले की एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने अधिनियम की धारा 3(1) का हवाला देते हुए दोहराया कि अपराध तभी बनता है, जब अपमान जानबूझकर और सार्वजनिक रूप से जाति के आधार पर किया गया हो। अदालत के इस फैसले को कानून के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। *✍️सोनू सिंह (Sonu Singh Journalist)*