
पंजाब बंद के दौरान फाजिल्का में बंदी सिंहों की रिहाई को लेकर चक्का जाम
फाजिल्का रेलवे फ्लाईओवर पर वारिस पंजाब और किसान जत्थेबंदियों का धरना, मरीजों, एंबुलेंस व सेना के वाहनों को दी गई छूट
फाजिल्का, 21 अगस्त,(सोनू वर्मा): बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर वारिस पंजाब संगठन और कौमी इंसाफ मोर्चा के पंजाब बंद के आह्वान का फाजिल्का में भी व्यापक असर देखने को मिला। फाजिल्का रेलवे फ्लाईओवर पर वारिस पंजाब संगठन तथा विभिन्न किसान जत्थेबंदियों ने एकजुट होकर धरना देकर चक्का जाम किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप किया और बंदी सिंहों की रिहाई के लिए अरदास की।
धरने के दौरान मानवता का ध्यान रखते हुए अस्पताल जाने वाले मरीजों, एंबुलेंस तथा सेना की गाड़ियों को आवाजाही की विशेष छूट दी गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिन बंदी सिंहों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उन्हें सरकार को तुरंत रिहा करना चाहिए।
इस मौके पर प्रदर्शनकारी नेताओं ने पंजाब के लोगों, विशेषकर फाजिल्का निवासियों, व्यापार मंडल, दुकानदारों, रेहड़ी वालों तथा सामाजिक संगठनों का बंद को समर्थन देने के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल किसी एक संगठन का नहीं बल्कि पंजाब और पंजाबियत की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। पंजाब की भलाई के लिए सभी लोगों को एकजुट होकर आगे आना होगा।
भारतीय किसान यूनियन मानसा के सूबा मीत प्रधान जसवीर सिंह रंधावा ने कहा कि पंथक और सिख जत्थेबंदियां लंबे समय से सजा पूरी कर चुके बंदी सिंहों की रिहाई की मांग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इसी मांग को लेकर वारिस पंजाब संगठन, अकाली दल वारिस पंजाब और कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से 21 अगस्त को पंजाब बंद का आह्वान किया गया था। संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर किसान भलाई सभा, भारतीय किसान यूनियन मानसा सहित विभिन्न जत्थेबंदियों ने फाजिल्का में चक्का जाम में भाग लिया।
अकाली दल वारिस पंजाब के हलका इंचार्ज दविंदर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से बंदी सिंहों की रिहाई के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन सरकार द्वारा उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि पंजाब बंद के समर्थन में फाजिल्का जिले की संस्थाओं, किसान जत्थेबंदियों, किसान भलाई सभा, सामाजिक संगठनों, व्यापार मंडल और अन्य संगठनों के सहयोग से शहर को बंद रखा गया।
दविंदर सिंह ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि जनता की भावनाओं को समझते हुए जिन बंदी सिंहों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उन्हें बिना देरी रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि ये जायज मांगें हैं और सरकार को इन्हें पूरा करने के लिए लोगों को बार-बार सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से धरने का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया था। इस दौरान फाजिल्का में भी बंद का व्यापक असर रहा। धरने के दौरान मरीजों, एंबुलेंस तथा सेना से संबंधित वाहनों को आवाजाही की विशेष छूट दी गई।