15 से 30 जुलाई तक चलेगा 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से नशा मुक्त मध्यप्रदेश बनाने की अपील की है।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ अभियान चलाने से नशे की समस्या खत्म हो जाएगी? एक तरफ शराब और अन्य नशों की वजह से खासकर गरीब और आदिवासी परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच रहे हैं, तो दूसरी ओर आबकारी विभाग से मिलने वाला राजस्व भी प्रदेश की आय का बड़ा स्रोत माना जाता है।
ऐसे में बड़ा सवाल जनता से...
क्या सरकार को नशा मुक्ति अभियान के साथ-साथ नशे की उपलब्धता पर भी और सख्त कदम उठाने चाहिए?
आपकी राय में प्रदेश को वास्तव में नशा मुक्त बनाने का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
अपनी बेबाक राय कमेंट में जरूर दें।
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