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Ladpura, Kota | Jul 13, 2026

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Long Year New Batch Start JET, CUET, Agriculture Supervisor, Foundation Batch
Call: 9828775695, 9785751505

Long Year New Batch Start JET, CUET, Agriculture Supervisor, Foundation Batch Call: 9828775695, 9785751505

Ladpura, Kota | Jul 15, 2026

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य प्रशांत शर्मा
🔮 ऑनलाइन एवं ऑफलाइन परामर्श उपलब्ध
💰 परामर्श शुल्क: ₹151 मात्र
📜 कुंडली निर्माण: ₹501 मात्र
📞 Call Now – 8209307204 अपना अपॉइंटमेंट बुक करें।

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य प्रशांत शर्मा 🔮 ऑनलाइन एवं ऑफलाइन परामर्श उपलब्ध 💰 परामर्श शुल्क: ₹151 मात्र 📜 कुंडली निर्माण: ₹501 मात्र 📞 Call Now – 8209307204 अपना अपॉइंटमेंट बुक करें।

Ladpura, Kota | Jul 15, 2026

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद अब कई अन्य मरीज भी गंभीर हालात से जूझ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती महिलाओं की हालत देखकर गरीब परिवारों में खौफ का माहौल है। कई परिवार अब सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी करवाने से कतराने लगे हैं।लेकिन आर्थिक मजबूरी के चलते उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री का इस ओर कोई ध्यान नहीं प्रदेश में प्रसूताओं तड़प तड़प कर मर रही है ओर स्वास्थ्य मंत्री हंस रहे है।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल का रवैया ठीक नहीं है और डॉक्टरों व स्टाफ की ओर से उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। कुछ परिवारों ने पहले भी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा था और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।
इसी बीच पिछले करीब 70 दिनों से मेडिकल कॉलेज में भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच प्रसूताओं के परिजनों  ने एक दिन पहले ही जिला कलेक्टर को मार्मिक ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिजनों का कहना है कि वे 4 मई से 8 मई 2026 के बीच प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई थीं। लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही और संदिग्ध दवाओं के कारण उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं।
प्रसूताओं ने बताया कि पिछले दो महीनों से अधिक समय से वे केवल डायलिसिस के सहारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। लगातार डायलिसिस की वजह से उन्हें असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है, जबकि उनके परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं।
ज्ञापन में मांग की है कि उनका तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। ट्रांसप्लांट और किडनी की पूरी व्यवस्था सरकारी खर्च पर उपलब्ध कराई जाए। परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए उपचार में लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए और ट्रांसप्लांट के बाद आजीवन इलाज की गारंटी दी जाए। इसके अलावा अस्पताल आने-जाने और आपातकालीन उपचार के लिए विशेष पास जारी करने की भी मांग की गई है।
कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा यह मामला अब केवल चिकित्सा लापरवाही का नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के भरोसे का सवाल बन गया है। जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाते हैं।

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद अब कई अन्य मरीज भी गंभीर हालात से जूझ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती महिलाओं की हालत देखकर गरीब परिवारों में खौफ का माहौल है। कई परिवार अब सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी करवाने से कतराने लगे हैं।लेकिन आर्थिक मजबूरी के चलते उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री का इस ओर कोई ध्यान नहीं प्रदेश में प्रसूताओं तड़प तड़प कर मर रही है ओर स्वास्थ्य मंत्री हंस रहे है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल का रवैया ठीक नहीं है और डॉक्टरों व स्टाफ की ओर से उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। कुछ परिवारों ने पहले भी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा था और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसी बीच पिछले करीब 70 दिनों से मेडिकल कॉलेज में भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच प्रसूताओं के परिजनों ने एक दिन पहले ही जिला कलेक्टर को मार्मिक ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिजनों का कहना है कि वे 4 मई से 8 मई 2026 के बीच प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई थीं। लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही और संदिग्ध दवाओं के कारण उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। प्रसूताओं ने बताया कि पिछले दो महीनों से अधिक समय से वे केवल डायलिसिस के सहारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। लगातार डायलिसिस की वजह से उन्हें असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है, जबकि उनके परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। ज्ञापन में मांग की है कि उनका तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। ट्रांसप्लांट और किडनी की पूरी व्यवस्था सरकारी खर्च पर उपलब्ध कराई जाए। परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए उपचार में लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए और ट्रांसप्लांट के बाद आजीवन इलाज की गारंटी दी जाए। इसके अलावा अस्पताल आने-जाने और आपातकालीन उपचार के लिए विशेष पास जारी करने की भी मांग की गई है। कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा यह मामला अब केवल चिकित्सा लापरवाही का नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के भरोसे का सवाल बन गया है। जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाते हैं।

Ladpura, Kota | Jul 15, 2026

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद अब कई अन्य मरीज भी गंभीर हालात से जूझ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती महिलाओं की हालत देखकर गरीब परिवारों में खौफ का माहौल है। कई परिवार अब सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी करवाने से कतराने लगे हैं।लेकिन आर्थिक मजबूरी के चलते उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री का इस ओर कोई ध्यान नहीं प्रदेश में प्रसूताओं तड़प तड़प कर मर रही है ओर स्वास्थ्य मंत्री हंस रहे है।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल का रवैया ठीक नहीं है और डॉक्टरों व स्टाफ की ओर से उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। कुछ परिवारों ने पहले भी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा था और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।
इसी बीच पिछले करीब 70 दिनों से मेडिकल कॉलेज में भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच प्रसूताओं के परिजनों  ने एक दिन पहले ही जिला कलेक्टर को मार्मिक ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिजनों का कहना है कि वे 4 मई से 8 मई 2026 के बीच प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई थीं। लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही और संदिग्ध दवाओं के कारण उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं।
प्रसूताओं ने बताया कि पिछले दो महीनों से अधिक समय से वे केवल डायलिसिस के सहारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। लगातार डायलिसिस की वजह से उन्हें असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है, जबकि उनके परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं।
ज्ञापन में मांग की है कि उनका तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। ट्रांसप्लांट और किडनी की पूरी व्यवस्था सरकारी खर्च पर उपलब्ध कराई जाए। परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए उपचार में लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए और ट्रांसप्लांट के बाद आजीवन इलाज की गारंटी दी जाए। इसके अलावा अस्पताल आने-जाने और आपातकालीन उपचार के लिए विशेष पास जारी करने की भी मांग की गई है।
कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा यह मामला अब केवल चिकित्सा लापरवाही का नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के भरोसे का सवाल बन गया है। जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाते हैं।

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद अब कई अन्य मरीज भी गंभीर हालात से जूझ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती महिलाओं की हालत देखकर गरीब परिवारों में खौफ का माहौल है। कई परिवार अब सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी करवाने से कतराने लगे हैं।लेकिन आर्थिक मजबूरी के चलते उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री का इस ओर कोई ध्यान नहीं प्रदेश में प्रसूताओं तड़प तड़प कर मर रही है ओर स्वास्थ्य मंत्री हंस रहे है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल का रवैया ठीक नहीं है और डॉक्टरों व स्टाफ की ओर से उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। कुछ परिवारों ने पहले भी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा था और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसी बीच पिछले करीब 70 दिनों से मेडिकल कॉलेज में भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच प्रसूताओं के परिजनों ने एक दिन पहले ही जिला कलेक्टर को मार्मिक ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिजनों का कहना है कि वे 4 मई से 8 मई 2026 के बीच प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई थीं। लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही और संदिग्ध दवाओं के कारण उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। प्रसूताओं ने बताया कि पिछले दो महीनों से अधिक समय से वे केवल डायलिसिस के सहारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। लगातार डायलिसिस की वजह से उन्हें असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है, जबकि उनके परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। ज्ञापन में मांग की है कि उनका तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। ट्रांसप्लांट और किडनी की पूरी व्यवस्था सरकारी खर्च पर उपलब्ध कराई जाए। परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए उपचार में लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए और ट्रांसप्लांट के बाद आजीवन इलाज की गारंटी दी जाए। इसके अलावा अस्पताल आने-जाने और आपातकालीन उपचार के लिए विशेष पास जारी करने की भी मांग की गई है। कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा यह मामला अब केवल चिकित्सा लापरवाही का नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के भरोसे का सवाल बन गया है। जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाते हैं।

Ladpura, Kota | Jul 15, 2026

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद अब कई अन्य मरीज भी गंभीर हालात से जूझ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती महिलाओं की हालत देखकर गरीब परिवारों में खौफ का माहौल है। कई परिवार अब सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी करवाने से कतराने लगे हैं।लेकिन आर्थिक मजबूरी के चलते उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री का इस ओर कोई ध्यान नहीं प्रदेश में प्रसूताओं तड़प तड़प कर मर रही है ओर स्वास्थ्य मंत्री हंस रहे है।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल का रवैया ठीक नहीं है और डॉक्टरों व स्टाफ की ओर से उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। कुछ परिवारों ने पहले भी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा था और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।
इसी बीच पिछले करीब 70 दिनों से मेडिकल कॉलेज में भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच प्रसूताओं के परिजनों  ने एक दिन पहले ही जिला कलेक्टर को मार्मिक ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिजनों का कहना है कि वे 4 मई से 8 मई 2026 के बीच प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई थीं। लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही और संदिग्ध दवाओं के कारण उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं।
प्रसूताओं ने बताया कि पिछले दो महीनों से अधिक समय से वे केवल डायलिसिस के सहारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। लगातार डायलिसिस की वजह से उन्हें असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है, जबकि उनके परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं।
ज्ञापन में मांग की है कि उनका तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। ट्रांसप्लांट और किडनी की पूरी व्यवस्था सरकारी खर्च पर उपलब्ध कराई जाए। परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए उपचार में लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए और ट्रांसप्लांट के बाद आजीवन इलाज की गारंटी दी जाए। इसके अलावा अस्पताल आने-जाने और आपातकालीन उपचार के लिए विशेष पास जारी करने की भी मांग की गई है।
कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा यह मामला अब केवल चिकित्सा लापरवाही का नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के भरोसे का सवाल बन गया है। जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाते हैं।

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद अब कई अन्य मरीज भी गंभीर हालात से जूझ रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती महिलाओं की हालत देखकर गरीब परिवारों में खौफ का माहौल है। कई परिवार अब सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी करवाने से कतराने लगे हैं।लेकिन आर्थिक मजबूरी के चलते उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री का इस ओर कोई ध्यान नहीं प्रदेश में प्रसूताओं तड़प तड़प कर मर रही है ओर स्वास्थ्य मंत्री हंस रहे है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल का रवैया ठीक नहीं है और डॉक्टरों व स्टाफ की ओर से उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। कुछ परिवारों ने पहले भी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा था और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसी बीच पिछले करीब 70 दिनों से मेडिकल कॉलेज में भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच प्रसूताओं के परिजनों ने एक दिन पहले ही जिला कलेक्टर को मार्मिक ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिजनों का कहना है कि वे 4 मई से 8 मई 2026 के बीच प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई थीं। लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही और संदिग्ध दवाओं के कारण उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। प्रसूताओं ने बताया कि पिछले दो महीनों से अधिक समय से वे केवल डायलिसिस के सहारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। लगातार डायलिसिस की वजह से उन्हें असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है, जबकि उनके परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। ज्ञापन में मांग की है कि उनका तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। ट्रांसप्लांट और किडनी की पूरी व्यवस्था सरकारी खर्च पर उपलब्ध कराई जाए। परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए उपचार में लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए और ट्रांसप्लांट के बाद आजीवन इलाज की गारंटी दी जाए। इसके अलावा अस्पताल आने-जाने और आपातकालीन उपचार के लिए विशेष पास जारी करने की भी मांग की गई है। कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा यह मामला अब केवल चिकित्सा लापरवाही का नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों के भरोसे का सवाल बन गया है। जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाते हैं।

Ladpura, Kota | Jul 15, 2026