
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली सितंबर, 2026 से पूरी तरह डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था लागू होगी। इसके बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों की हाजिरी रजिस्टर पर नहीं, बल्कि विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। यही नहीं, स्कूलों के निरीक्षण की प्रक्रिया भी अब डिजिटल प्लेटफार्म से संचालित होगी। यह महत्त्वपूर्ण निर्णय सोमवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में शिक्षा निदेशालय में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में लिया गया। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एक सप्ताह के भीतर विद्या समीक्षा केंद्र की टीम ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का पूरा खाका तैयार करे और इसके बाद सभी जिला उपनिदेशकों को प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि पहली सितंबर से व्यवस्था पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू हो सके। उन्होंने कहा कि डिजिटल मॉनिटरिंग से स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और शिक्षा व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनेगी।
शिक्षा मंत्री ने यह भी घोषणा की कि सरकारी स्कूलों से नीट, जेईई मेन्स और जेईई एडवांस जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल विद्यार्थियों को प्रदेश सरकार सम्मानित करेगी। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित स्वच्छ एवं हरित विद्यालय अभियान में हिमाचल के 11 विद्यालयों का चयन हुआ है। चयनित प्रत्येक विद्यालय को एक लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि मिलेगी तथा संबंधित प्रधानाचार्य को एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाएगा। शिक्षा मंत्री ने इसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि बताया। शिक्षा विभाग ने शिव नाडर फाउंडेशन के साथ एमओयू के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए आवासीय शिक्षा का रास्ता खोला है। पांचवीं के विद्यार्थियों की परीक्षा के आधार पर चयन होगा और छठी से बारहवीं तक की पूरी पढ़ाई का खर्च फाउंडेशन उठाएगा। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त और परीक्षा 20 सितंबर को होगी। विभाग ने प्रत्येक जिला में संयुक्त निदेशक का एक नया पद सृजित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया है। इससे उपनिदेशकों को पदोन्नति के अवसर मिलेंगे और जिला स्तर पर शिक्षा प्रशासन को और मजबूत बनाया जाएगा।
शिक्षक पुरस्कारों के चयन में बदलाव
राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए इस बार चयन प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं। अब स्कूल भी स्वयं आवेदन कर सकेंगे, जबकि डीसी, एसडीएम, उपनिदेशक और स्कूल प्रबंधन समितियां भी नामांकन भेज सकेंगी। इस बार जनजातीय क्षेत्रों में सेवा के अतिरिक्त अंक समाप्त कर दिए गए हैं और नवाचार, सीखने के परिणाम तथा विद्यार्थियों के जीवन में वास्तविक बदलाव को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन करने वाले शिक्षकों का निरीक्षण अब जिला स्तर नहीं, बल्कि शिक्षा निदेशालय स्तर की समिति करेगी। विद्यार्थियों से शिक्षकों के बारे में ऑनलाइन फीडबैक भी लिया जाएगा।
अस्थायी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पॉलिसी
शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में जम्मू-कश्मीर मॉडल पर हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में अस्थायी शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार करने का भी निर्णय लिया गया। समग्र शिक्षा अभियान के तहत एक वर्ष के लिए नियुक्तियां की जाएंगी और हर वर्ष नई मेरिट सूची के आधार पर चयन होगा। चयन प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और उच्च शिक्षा को वेटेज दिया जाएगा। चयनित शिक्षकों को 25 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय देने का प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। यह भी सामने आया है कि प्रदेश के 124 पीएमश्री स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।