उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शराब की गंध के आधार पर चालक को नशे में नहीं माना जा सकता।
ड्रंक ड्राइविंग साबित करने के लिए ब्लड टेस्ट या ब्रीथ एनालाइजर जैसी वैज्ञानिक जांच जरूरी होगी।
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