
बिहार बंद के बाद पुलिस कार्रवाई पर भड़के छात्र-युवा संगठन, पटना में प्रेस वार्ता कर सरकार से गिरफ्तार नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग।
AISA और RYA समेत कई संगठनों ने पुलिसिया दमन का लगाया आरोप, कहा— लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बर्दाश्त नहीं होगा।
पटना। बिहार बंद के बाद हुई पुलिस कार्रवाई और छात्र-युवा नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार को पटना में विभिन्न छात्र एवं युवा संगठनों ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। इस दौरान नेताओं ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की बिना शर्त तत्काल रिहाई की मांग की।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा, राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन, AISA के महासचिव प्रसन्नजीत, JNUSU के पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार सहित अन्य नेताओं ने कहा कि सरकार छात्र-युवाओं की आवाज को पुलिसिया दमन और तानाशाहीपूर्ण रवैये से दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वालों पर कार्रवाई करना संविधान और लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
नेताओं ने बताया कि 25 जुलाई को आयोजित बिहार बंद से पहले विधायक संदीप सौरभ, धनंजय, सबा, दीपांकर और दिव्यम को गिरफ्तार किया गया था। वहीं बिहार बंद के बाद RYA के जिला उपाध्यक्ष विशाल यादव, अरुण कुमार, विश्वकर्मा कुशवाहा, पवन कुशवाहा सहित सैकड़ों छात्र-युवा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया।
छात्र-युवा संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार जनसरोकार के मुद्दों पर बातचीत करने के बजाय दमनात्मक कार्रवाई का रास्ता अपना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और युवाओं की जायज मांगों पर संवाद करना चाहिए, न कि उन्हें जेल भेजकर आंदोलन को दबाने की कोशिश करनी चाहिए।
संवाददाता सम्मेलन में नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक सभी गिरफ्तार साथियों की बिना शर्त रिहाई नहीं होती और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन और संघर्ष जारी रहेगा।
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