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सुलगता सवाल: लखनऊ हादसे के बाद क्या जागेगा बैतूल प्रशासन? बिना एनओसी और सेफ्टी के चल रहे कोचिंग संस्थानों पर कब होगी कार्रवाई?

बैतूल। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक अवैध बिल्डिंग में बेसमेंट और कोचिंग सेंटर की लापरवाही के चलते 15 मासूम छात्रों की जान चली गई। इस हृदय विदारक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस खौफनाक हादसे से मध्य प्रदेश और विशेष रूप से हमारा बैतूल जिला प्रशासन कोई सबक लेगा? क्या बैतूल में किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है, या समय रहते मासूमों की जिंदगी की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे?
बैतूल में भी मंडरा रहा है खतरा: नियमों को ताक पर रख कर चल रही हैं मल्टियां
अगर बैतूल शहर की बात करें, तो यहाँ भी गंज, कोठी बाजार और मुख्य मार्गों पर दर्जनों ऐसे कोचिंग संस्थान, स्कूल और सार्वजनिक मल्टियां हैं, जो सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा रही हैं।
सुरक्षा के नाम पर शून्य: कई नामचीन कोचिंग सेंटर तंग गलियों में, बिना फायर एनओसी (Fire NOC) और बिना इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) के धड़ल्ले से चल रहे हैं।
मौत के कुएं बने बेसमेंट: कई बहुमंजिला इमारतों के बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियां या क्लासरूम संचालित हो रहे हैं, जहाँ जलभराव या शार्ट सर्किट होने पर भागने का कोई रास्ता तक नहीं है।
बिना राजनीतिक दबाव के हो तत्काल एक्शन
लखनऊ जैसी खौफनाक वारदात बैतूल या मध्य प्रदेश के किसी अन्य हिस्से में दोबारा न हो, इसके लिए शासन और जिला प्रशासन को तत्काल प्रभाव से 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनानी होगी। अक्सर देखा जाता है कि रसूखदारों और राजनीतिक संरक्षण के कारण इन अवैध बिल्डिंगों पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। जनता की मांग है कि बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे संस्थानों पर बिना किसी राजनीतिक भेदभाव और दबाव के तत्काल ताला जड़ा जाए।
प्रशासन से सीधे 4 चुभते सवाल:
फायर ऑडिट कहाँ है? बैतूल नगर पालिका और जिला प्रशासन ने शहर की तंग गलियों में चल रहे कोचिंग सेंटरों का आखिरी बार फायर ऑडिट कब किया था?
इमरजेंसी एग्जिट क्यों नहीं? क्या प्रशासन को नहीं दिखता कि सैकड़ों बच्चे जिन कमरों में पढ़ रहे हैं, वहाँ अंदर जाने और बाहर आने का सिर्फ एक ही संकरा रास्ता है?
बेसमेंट का अवैध उपयोग क्यों? नियमों के खिलाफ जाकर बेसमेंट में कोचिंग और दफ्तर कैसे संचालित हो रहे हैं?
हादसे का इंतजार क्यों? क्या बैतूल प्रशासन लखनऊ जैसी किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही नींद से जागेगा?
अब अभियान नहीं, परमानेंट एक्शन की जरूरत
अब समय आ गया है कि मध्य प्रदेश सरकार और बैतूल कलेक्टर तत्काल एक संयुक्त टीम (राजस्व, पुलिस और नगर पालिका) का गठन करें। दिखावे के लिए दो-चार दिन का अभियान चलाने के बजाय एक स्थायी गाइडलाइन लागू होनी चाहिए। हर उस स्कूल, कोचिंग और सार्वजनिक स्थान को सील किया जाना चाहिए जिसके पास वैध फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और एग्जिट रूट नहीं है।
वक्त रहते अगर बैतूल प्रशासन ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो लापरवाही की यह मूक सहमति किसी दिन बड़े हादसे को आमंत्रण देगी। नौनिहालों की जिंदगी से बढ़कर कोई राजनीति या रसूख नहीं हो सकता।
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सुलगता सवाल: लखनऊ हादसे के बाद क्या जागेगा बैतूल प्रशासन? बिना एनओसी और सेफ्टी के चल रहे कोचिंग संस्थानों पर कब होगी कार्रवाई? बैतूल। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक अवैध बिल्डिंग में बेसमेंट और कोचिंग सेंटर की लापरवाही के चलते 15 मासूम छात्रों की जान चली गई। इस हृदय विदारक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस खौफनाक हादसे से मध्य प्रदेश और विशेष रूप से हमारा बैतूल जिला प्रशासन कोई सबक लेगा? क्या बैतूल में किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है, या समय रहते मासूमों की जिंदगी की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे? बैतूल में भी मंडरा रहा है खतरा: नियमों को ताक पर रख कर चल रही हैं मल्टियां अगर बैतूल शहर की बात करें, तो यहाँ भी गंज, कोठी बाजार और मुख्य मार्गों पर दर्जनों ऐसे कोचिंग संस्थान, स्कूल और सार्वजनिक मल्टियां हैं, जो सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा रही हैं। सुरक्षा के नाम पर शून्य: कई नामचीन कोचिंग सेंटर तंग गलियों में, बिना फायर एनओसी (Fire NOC) और बिना इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) के धड़ल्ले से चल रहे हैं। मौत के कुएं बने बेसमेंट: कई बहुमंजिला इमारतों के बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियां या क्लासरूम संचालित हो रहे हैं, जहाँ जलभराव या शार्ट सर्किट होने पर भागने का कोई रास्ता तक नहीं है। बिना राजनीतिक दबाव के हो तत्काल एक्शन लखनऊ जैसी खौफनाक वारदात बैतूल या मध्य प्रदेश के किसी अन्य हिस्से में दोबारा न हो, इसके लिए शासन और जिला प्रशासन को तत्काल प्रभाव से 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनानी होगी। अक्सर देखा जाता है कि रसूखदारों और राजनीतिक संरक्षण के कारण इन अवैध बिल्डिंगों पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। जनता की मांग है कि बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे संस्थानों पर बिना किसी राजनीतिक भेदभाव और दबाव के तत्काल ताला जड़ा जाए। प्रशासन से सीधे 4 चुभते सवाल: फायर ऑडिट कहाँ है? बैतूल नगर पालिका और जिला प्रशासन ने शहर की तंग गलियों में चल रहे कोचिंग सेंटरों का आखिरी बार फायर ऑडिट कब किया था? इमरजेंसी एग्जिट क्यों नहीं? क्या प्रशासन को नहीं दिखता कि सैकड़ों बच्चे जिन कमरों में पढ़ रहे हैं, वहाँ अंदर जाने और बाहर आने का सिर्फ एक ही संकरा रास्ता है? बेसमेंट का अवैध उपयोग क्यों? नियमों के खिलाफ जाकर बेसमेंट में कोचिंग और दफ्तर कैसे संचालित हो रहे हैं? हादसे का इंतजार क्यों? क्या बैतूल प्रशासन लखनऊ जैसी किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही नींद से जागेगा? अब अभियान नहीं, परमानेंट एक्शन की जरूरत अब समय आ गया है कि मध्य प्रदेश सरकार और बैतूल कलेक्टर तत्काल एक संयुक्त टीम (राजस्व, पुलिस और नगर पालिका) का गठन करें। दिखावे के लिए दो-चार दिन का अभियान चलाने के बजाय एक स्थायी गाइडलाइन लागू होनी चाहिए। हर उस स्कूल, कोचिंग और सार्वजनिक स्थान को सील किया जाना चाहिए जिसके पास वैध फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और एग्जिट रूट नहीं है। वक्त रहते अगर बैतूल प्रशासन ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो लापरवाही की यह मूक सहमति किसी दिन बड़े हादसे को आमंत्रण देगी। नौनिहालों की जिंदगी से बढ़कर कोई राजनीति या रसूख नहीं हो सकता। #Betul #MadhyaPradesh #StudentSafetyFirst #CoachingSafety #BetulAdministration #SaveOurStudents #ViralNews #BetulNews #ZeroTolerance

Betul Nagar, Betul | Jun 24, 2026

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