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हिमाचल में अ| वैध खनन पर जीरो टॉलरेंस
"शिकायत पर तय होगी विभागीय जिम्मेदारी" -हर्षवर्धन चौहान
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Mandi, Mandi | Jul 9, 2026

सतना : वायरल ऑडियो ने खोली पोल! सहकारिता विभाग पर उठे गंभीर सवाल

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Madhya Pradesh, India | Jul 6, 2026

औरंगाबाद में बिजली विभाग के जेई साहब पर FIR, क्या जेई साहब होंगे गिरफ्तार!

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Bihar, India | Jun 20, 2026

रिश्वत के आरोप के बीच बस कर्मचारी से मारपीट? नोएडा का वीडियो वायरल

परिवहन विभाग के पीटीओ पर गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

महामाया फ्लाईओवर पर हुई कथित घटना से विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

✒️रिपोर्ट स्टेट हेड रोशन लाल श्रीवास्तव एनसीआर

नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के नोएडा स्थित महामाया फ्लाईओवर पर परिवहन विभाग के एक अधिकारी और बस कर्मचारी के बीच हुए कथित विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के आचरण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और मामले की आधिकारिक जांच की प्रतीक्षा है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा में सोमवार सुबह उस समय विवाद खड़ा हो गया जब गोरखपुर से दिल्ली जा रही एक स्लीपर बस को महामाया फ्लाईओवर के पास परिवहन विभाग की चेकिंग टीम ने रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चेकिंग के दौरान बस कर्मचारी और परिवहन विभाग के पीटीओ के बीच कहासुनी हो गई।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कथित तौर पर बस कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार और थप्पड़ मारने की घटना दिखाई दे रही है। वायरल पोस्टों में आरोप लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वत की मांग पूरी न होने पर विवाद बढ़ा और मामला मारपीट तक पहुंच गया। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले पूरे मामले की जांच आवश्यक है।

परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

वायरल वीडियो के बाद यह बहस तेज हो गई है कि सड़क परिवहन चेकिंग के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच व्यवहार की मर्यादा तथा पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला विभागीय अनुशासन और जवाबदेही से भी जुड़ सकता है।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल घटना को लेकर आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ऐसे में वायरल वीडियो और सोशल मीडिया दावों के आधार पर किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

नोएडा में सामने आई इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और सार्वजनिक सेवाओं में आचरण संबंधी मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग मामले की जांच किस प्रकार करता है और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

🟥 ND NEWS की अपील

🔹 सभी सरकारी विभागों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सम्मानजनक व्यवहार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
🔹 किसी भी शिकायत या आरोप की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच होनी चाहिए ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
🔹 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा आचरण नियमों का पालन करते हुए जनता से संवाद करना चाहिए।
🔹 परिवहन विभाग को चेकिंग प्रक्रिया में बॉडी कैमरा, डिजिटल रिकॉर्डिंग और पारदर्शी व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए।
🔹 नागरिकों से भी अपील है कि किसी घटना का वीडियो साझा करते समय अफवाहों से बचें और सत्यापित जानकारी को ही प्रसारित करें।

"पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेह व्यवस्था ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।"
👇👇
@UPGovt
@InfoDeptUP
@UPTransportDept
@myogiadityanath
@CMOfficeUP
@ChiefSecyUP
@dmgbnagar
@noidatraffic
@Uppolice
@noidapolice
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#NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #Noida #GautamBuddhNagar #TransportDepartment #ViralVideo #BreakingNews #UPNews #PublicAccountability #RoadTransport
#नोएडा #परिवहन_विभाग #उत्तरप्रदेश_सरकार #वायरल_वीडियो #जनहित #प्रशासनिक_जवाबदेही #NDNewsChannel #DailyNishpakshDhara
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🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा
मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया
✒️ रिपोर्ट : स्टेट हेड रोशन लाल श्रीवास्तव एनसीआर
📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – (110092) (NCR)
📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ (226001) (UP)
📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर (212601) (UP)
📅 दिनांक: 18 जून 2026
📆 दिन: गुरुवार
📧 Email: ndnewschannel@gmail.com
📞 मोबाइल: 9696119696

रिश्वत के आरोप के बीच बस कर्मचारी से मारपीट? नोएडा का वीडियो वायरल परिवहन विभाग के पीटीओ पर गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग तेज महामाया फ्लाईओवर पर हुई कथित घटना से विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल ✒️रिपोर्ट स्टेट हेड रोशन लाल श्रीवास्तव एनसीआर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के नोएडा स्थित महामाया फ्लाईओवर पर परिवहन विभाग के एक अधिकारी और बस कर्मचारी के बीच हुए कथित विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के आचरण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और मामले की आधिकारिक जांच की प्रतीक्षा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा में सोमवार सुबह उस समय विवाद खड़ा हो गया जब गोरखपुर से दिल्ली जा रही एक स्लीपर बस को महामाया फ्लाईओवर के पास परिवहन विभाग की चेकिंग टीम ने रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चेकिंग के दौरान बस कर्मचारी और परिवहन विभाग के पीटीओ के बीच कहासुनी हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कथित तौर पर बस कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार और थप्पड़ मारने की घटना दिखाई दे रही है। वायरल पोस्टों में आरोप लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वत की मांग पूरी न होने पर विवाद बढ़ा और मामला मारपीट तक पहुंच गया। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले पूरे मामले की जांच आवश्यक है। परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल वायरल वीडियो के बाद यह बहस तेज हो गई है कि सड़क परिवहन चेकिंग के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच व्यवहार की मर्यादा तथा पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला विभागीय अनुशासन और जवाबदेही से भी जुड़ सकता है। जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई फिलहाल घटना को लेकर आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ऐसे में वायरल वीडियो और सोशल मीडिया दावों के आधार पर किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। नोएडा में सामने आई इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और सार्वजनिक सेवाओं में आचरण संबंधी मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग मामले की जांच किस प्रकार करता है और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। 🟥 ND NEWS की अपील 🔹 सभी सरकारी विभागों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सम्मानजनक व्यवहार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। 🔹 किसी भी शिकायत या आरोप की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच होनी चाहिए ताकि जनता का विश्वास बना रहे। 🔹 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा आचरण नियमों का पालन करते हुए जनता से संवाद करना चाहिए। 🔹 परिवहन विभाग को चेकिंग प्रक्रिया में बॉडी कैमरा, डिजिटल रिकॉर्डिंग और पारदर्शी व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए। 🔹 नागरिकों से भी अपील है कि किसी घटना का वीडियो साझा करते समय अफवाहों से बचें और सत्यापित जानकारी को ही प्रसारित करें। "पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेह व्यवस्था ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।" 👇👇 @UPGovt @InfoDeptUP @UPTransportDept @myogiadityanath @CMOfficeUP @ChiefSecyUP @dmgbnagar @noidatraffic @Uppolice @noidapolice 👇👇 #NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #Noida #GautamBuddhNagar #TransportDepartment #ViralVideo #BreakingNews #UPNews #PublicAccountability #RoadTransport #नोएडा #परिवहन_विभाग #उत्तरप्रदेश_सरकार #वायरल_वीडियो #जनहित #प्रशासनिक_जवाबदेही #NDNewsChannel #DailyNishpakshDhara 👇👇 🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया ✒️ रिपोर्ट : स्टेट हेड रोशन लाल श्रीवास्तव एनसीआर 📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – (110092) (NCR) 📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ (226001) (UP) 📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर (212601) (UP) 📅 दिनांक: 18 जून 2026 📆 दिन: गुरुवार 📧 Email: ndnewschannel@gmail.com 📞 मोबाइल: 9696119696

Fatehpur, Fatehpur | Jun 17, 2026

पांगी अंधेरे में, विभाग गहरी नींद में! एक माह से बंद पड़ा साच घराट पावर हाउस, जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन?

 जनजातीय क्षेत्र पांगी में बिजली व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। साच घराट पावर हाउस की एक टरबाइन फटने के बाद पिछले एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विद्युत विभाग आज तक इसे दुरुस्त नहीं कर पाया है। नतीजतन पूरा क्षेत्र बिजली संकट से जूझ रहा है और आम जनता अंधेरे तथा अव्यवस्था का खामियाजा भुगतने को मजबूर है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पावर हाउस के रखरखाव और मरम्मत पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, उसकी हालत इतनी बदतर क्यों है? आखिर वह पैसा कहां खर्च हो रहा है, जिसका दावा विभाग लगातार करता रहा है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि साच घराट पावर हाउस में 450-450 किलोवाट क्षमता की दो टरबाइन स्थापित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि स्थापना के बाद से शायद ही कभी दोनों टरबाइन अपनी पूरी क्षमता के साथ चली हों। अधिकतर समय केवल एक मशीन के सहारे बिजली उत्पादन किया जाता रहा, जबकि दूसरी मशीन को स्टैंडबाय के नाम पर रखा गया। अब हालात ऐसे हैं कि स्टैंडबाय मशीन की स्थिति भी किसी कबाड़ से कम नहीं बताई जा रही है।

लोगों का आरोप है कि विभाग वर्षों से मरम्मत और रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा करता आया है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि समय-समय पर सही रखरखाव किया गया होता तो क्या आज एक टरबाइन फटने के बाद पूरा क्षेत्र एक महीने से अधिक समय तक अंधेरे में डूबा रहता?

बताया जा रहा है कि खराब टरबाइन को यमुनानगर की एक वर्कशॉप में भेजा गया है। हैरानी की बात यह है कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग यह बताने की स्थिति में नहीं है कि टरबाइन कब तक वापस आएगी और बिजली व्यवस्था कब तक सामान्य होगी। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पांगी जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में बिजली केवल सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता है। बिजली के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई, व्यापारिक गतिविधियां, सरकारी कार्य और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद विभाग की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

वहीं धनवास सोलर पावर प्लांट की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में असंतोष है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पांगी के ऊर्जा ढांचे पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का वास्तविक लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा?

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि साच घराट पावर हाउस में हुए नुकसान, रखरखाव पर हुए खर्च और मरम्मत कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि पिछले वर्षों में मरम्मत के नाम पर कितना धन खर्च हुआ और उसके क्या परिणाम सामने आए।

जनता का साफ कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पावर हाउस एक टरबाइन के सहारे चलता रहा और आज एक माह से अधिक समय तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई, तो यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर नाकामी का उदाहरण है।
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पांगी अंधेरे में, विभाग गहरी नींद में! एक माह से बंद पड़ा साच घराट पावर हाउस, जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन? जनजातीय क्षेत्र पांगी में बिजली व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। साच घराट पावर हाउस की एक टरबाइन फटने के बाद पिछले एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विद्युत विभाग आज तक इसे दुरुस्त नहीं कर पाया है। नतीजतन पूरा क्षेत्र बिजली संकट से जूझ रहा है और आम जनता अंधेरे तथा अव्यवस्था का खामियाजा भुगतने को मजबूर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पावर हाउस के रखरखाव और मरम्मत पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, उसकी हालत इतनी बदतर क्यों है? आखिर वह पैसा कहां खर्च हो रहा है, जिसका दावा विभाग लगातार करता रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि साच घराट पावर हाउस में 450-450 किलोवाट क्षमता की दो टरबाइन स्थापित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि स्थापना के बाद से शायद ही कभी दोनों टरबाइन अपनी पूरी क्षमता के साथ चली हों। अधिकतर समय केवल एक मशीन के सहारे बिजली उत्पादन किया जाता रहा, जबकि दूसरी मशीन को स्टैंडबाय के नाम पर रखा गया। अब हालात ऐसे हैं कि स्टैंडबाय मशीन की स्थिति भी किसी कबाड़ से कम नहीं बताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि विभाग वर्षों से मरम्मत और रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा करता आया है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि समय-समय पर सही रखरखाव किया गया होता तो क्या आज एक टरबाइन फटने के बाद पूरा क्षेत्र एक महीने से अधिक समय तक अंधेरे में डूबा रहता? बताया जा रहा है कि खराब टरबाइन को यमुनानगर की एक वर्कशॉप में भेजा गया है। हैरानी की बात यह है कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग यह बताने की स्थिति में नहीं है कि टरबाइन कब तक वापस आएगी और बिजली व्यवस्था कब तक सामान्य होगी। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पांगी जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में बिजली केवल सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता है। बिजली के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई, व्यापारिक गतिविधियां, सरकारी कार्य और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद विभाग की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही। वहीं धनवास सोलर पावर प्लांट की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में असंतोष है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पांगी के ऊर्जा ढांचे पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का वास्तविक लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा? क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि साच घराट पावर हाउस में हुए नुकसान, रखरखाव पर हुए खर्च और मरम्मत कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि पिछले वर्षों में मरम्मत के नाम पर कितना धन खर्च हुआ और उसके क्या परिणाम सामने आए। जनता का साफ कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पावर हाउस एक टरबाइन के सहारे चलता रहा और आज एक माह से अधिक समय तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई, तो यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर नाकामी का उदाहरण है। #PangiPowerCrisis #SachGharatPowerHouse #ElectricityFailure #HimachalPradesh #PowerOutage #TribalAreaIssues #PublicAccountability #HydroPowerProject #InfrastructureFailure #PangiNews #HimachalNews #EnergyCrisis #GovernmentAccountability #BreakingNews #PowerSector हिम संदेश Pangi Administration CMO Himachal Sukhvinder Singh Sukhu Jagat Singh Negi Adv Surjeet Sharma Bharmouri Janak Raj Shiv Suryavanshi हिम शिखर पांगी

Saach, Chamba | Jun 11, 2026

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