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पांगी घाटी को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सौगात, ब्लड बैंक स्थापना की संभावनाओं पर भी विचार।

विशेष स्वास्थ्य जागरूकता एवं रक्तदान शिविर जल्द होंगे आयोजित, स्वास्थ्य विभाग ने तेज किए प्रयास।
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पांगी घाटी को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सौगात, ब्लड बैंक स्थापना की संभावनाओं पर भी विचार। विशेष स्वास्थ्य जागरूकता एवं रक्तदान शिविर जल्द होंगे आयोजित, स्वास्थ्य विभाग ने तेज किए प्रयास। #PangiValley #Chamba #Healthcare #HealthAwareness #BloodDonation #BloodBank #HealthcareServices #HimachalPradesh #TribalArea #PublicHealth #MedicalServices #HealthDepartment #RuralHealthcare #CommunityHealth #BloodDonationCamp #HealthForAll #PangiNews #ChambaNews #HimachalNews #HealthInitiative हिम संदेश Shiv Suryavanshi Adv Surjeet Sharma Bharmouri Janak Raj Pangi Live News

Saach, Chamba | Jun 18, 2026

पांगी में मेगा मॉक ड्रिल: बादल फटना, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों का हुआ व्यापक परीक्षण
#PangiValley #MockDrill #DisasterManagement #Cloudburst #Landslide #FloodPreparedness #EmergencyResponse #HimachalPradesh #TribalArea #RescueOperation #IncidentResponseTeam #DisasterPreparedness #ChambaNews #PangiNews #SafetyFirst #PublicAwareness
हिम संदेश Pangi Administration

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Saach, Chamba | Jun 15, 2026

पांगी अंधेरे में, विभाग गहरी नींद में! एक माह से बंद पड़ा साच घराट पावर हाउस, जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन?

 जनजातीय क्षेत्र पांगी में बिजली व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। साच घराट पावर हाउस की एक टरबाइन फटने के बाद पिछले एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विद्युत विभाग आज तक इसे दुरुस्त नहीं कर पाया है। नतीजतन पूरा क्षेत्र बिजली संकट से जूझ रहा है और आम जनता अंधेरे तथा अव्यवस्था का खामियाजा भुगतने को मजबूर है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पावर हाउस के रखरखाव और मरम्मत पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, उसकी हालत इतनी बदतर क्यों है? आखिर वह पैसा कहां खर्च हो रहा है, जिसका दावा विभाग लगातार करता रहा है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि साच घराट पावर हाउस में 450-450 किलोवाट क्षमता की दो टरबाइन स्थापित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि स्थापना के बाद से शायद ही कभी दोनों टरबाइन अपनी पूरी क्षमता के साथ चली हों। अधिकतर समय केवल एक मशीन के सहारे बिजली उत्पादन किया जाता रहा, जबकि दूसरी मशीन को स्टैंडबाय के नाम पर रखा गया। अब हालात ऐसे हैं कि स्टैंडबाय मशीन की स्थिति भी किसी कबाड़ से कम नहीं बताई जा रही है।

लोगों का आरोप है कि विभाग वर्षों से मरम्मत और रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा करता आया है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि समय-समय पर सही रखरखाव किया गया होता तो क्या आज एक टरबाइन फटने के बाद पूरा क्षेत्र एक महीने से अधिक समय तक अंधेरे में डूबा रहता?

बताया जा रहा है कि खराब टरबाइन को यमुनानगर की एक वर्कशॉप में भेजा गया है। हैरानी की बात यह है कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग यह बताने की स्थिति में नहीं है कि टरबाइन कब तक वापस आएगी और बिजली व्यवस्था कब तक सामान्य होगी। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पांगी जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में बिजली केवल सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता है। बिजली के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई, व्यापारिक गतिविधियां, सरकारी कार्य और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद विभाग की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

वहीं धनवास सोलर पावर प्लांट की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में असंतोष है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पांगी के ऊर्जा ढांचे पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का वास्तविक लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा?

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि साच घराट पावर हाउस में हुए नुकसान, रखरखाव पर हुए खर्च और मरम्मत कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि पिछले वर्षों में मरम्मत के नाम पर कितना धन खर्च हुआ और उसके क्या परिणाम सामने आए।

जनता का साफ कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पावर हाउस एक टरबाइन के सहारे चलता रहा और आज एक माह से अधिक समय तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई, तो यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर नाकामी का उदाहरण है।
#PangiPowerCrisis #SachGharatPowerHouse #ElectricityFailure #HimachalPradesh #PowerOutage #TribalAreaIssues #PublicAccountability #HydroPowerProject #InfrastructureFailure #PangiNews #HimachalNews #EnergyCrisis #GovernmentAccountability #BreakingNews #PowerSector हिम संदेश Pangi Administration CMO Himachal Sukhvinder Singh Sukhu Jagat Singh Negi Adv Surjeet Sharma Bharmouri Janak Raj Shiv Suryavanshi हिम शिखर पांगी

पांगी अंधेरे में, विभाग गहरी नींद में! एक माह से बंद पड़ा साच घराट पावर हाउस, जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन? जनजातीय क्षेत्र पांगी में बिजली व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। साच घराट पावर हाउस की एक टरबाइन फटने के बाद पिछले एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विद्युत विभाग आज तक इसे दुरुस्त नहीं कर पाया है। नतीजतन पूरा क्षेत्र बिजली संकट से जूझ रहा है और आम जनता अंधेरे तथा अव्यवस्था का खामियाजा भुगतने को मजबूर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पावर हाउस के रखरखाव और मरम्मत पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, उसकी हालत इतनी बदतर क्यों है? आखिर वह पैसा कहां खर्च हो रहा है, जिसका दावा विभाग लगातार करता रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि साच घराट पावर हाउस में 450-450 किलोवाट क्षमता की दो टरबाइन स्थापित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि स्थापना के बाद से शायद ही कभी दोनों टरबाइन अपनी पूरी क्षमता के साथ चली हों। अधिकतर समय केवल एक मशीन के सहारे बिजली उत्पादन किया जाता रहा, जबकि दूसरी मशीन को स्टैंडबाय के नाम पर रखा गया। अब हालात ऐसे हैं कि स्टैंडबाय मशीन की स्थिति भी किसी कबाड़ से कम नहीं बताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि विभाग वर्षों से मरम्मत और रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा करता आया है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि समय-समय पर सही रखरखाव किया गया होता तो क्या आज एक टरबाइन फटने के बाद पूरा क्षेत्र एक महीने से अधिक समय तक अंधेरे में डूबा रहता? बताया जा रहा है कि खराब टरबाइन को यमुनानगर की एक वर्कशॉप में भेजा गया है। हैरानी की बात यह है कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग यह बताने की स्थिति में नहीं है कि टरबाइन कब तक वापस आएगी और बिजली व्यवस्था कब तक सामान्य होगी। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पांगी जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में बिजली केवल सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता है। बिजली के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई, व्यापारिक गतिविधियां, सरकारी कार्य और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद विभाग की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही। वहीं धनवास सोलर पावर प्लांट की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में असंतोष है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पांगी के ऊर्जा ढांचे पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का वास्तविक लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा? क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि साच घराट पावर हाउस में हुए नुकसान, रखरखाव पर हुए खर्च और मरम्मत कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि पिछले वर्षों में मरम्मत के नाम पर कितना धन खर्च हुआ और उसके क्या परिणाम सामने आए। जनता का साफ कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पावर हाउस एक टरबाइन के सहारे चलता रहा और आज एक माह से अधिक समय तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई, तो यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर नाकामी का उदाहरण है। #PangiPowerCrisis #SachGharatPowerHouse #ElectricityFailure #HimachalPradesh #PowerOutage #TribalAreaIssues #PublicAccountability #HydroPowerProject #InfrastructureFailure #PangiNews #HimachalNews #EnergyCrisis #GovernmentAccountability #BreakingNews #PowerSector हिम संदेश Pangi Administration CMO Himachal Sukhvinder Singh Sukhu Jagat Singh Negi Adv Surjeet Sharma Bharmouri Janak Raj Shiv Suryavanshi हिम शिखर पांगी

Saach, Chamba | Jun 11, 2026

पांगी घाटी के लंबित विकास कार्यों को लेकर पूर्व प्रधान कल्याण ठाकुर ने उठाई आवाज, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
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Pangi, Chamba | Jun 9, 2026

सच्चे जोत का आपातकालीन बंकर बदहाल, यात्रियों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

पांगी/चम्बा। 
पांगी घाटी को जिला मुख्यालय चम्बा से जोड़ने वाले दुर्गम एवं महत्वपूर्ण सच्चे जोत मार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा वर्षों पहले एक आपातकालीन बंकर का निर्माण किया गया था। इस बंकर का उद्देश्य खराब मौसम, भारी बर्फबारी, भूस्खलन अथवा वाहन खराब होने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध करवाना था। लेकिन वर्तमान समय में यह बंकर स्वयं बदहाली का शिकार हो चुका है और यात्रियों के लिए किसी भी प्रकार की राहत देने की स्थिति में नहीं है।

हाल ही में किए गए निरीक्षण के दौरान बंकर की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। बंकर के अंदर भारी मात्रा में बर्फ जमा हुई है, जिससे इसका अधिकांश हिस्सा उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। वहीं इसकी छत भी कई स्थानों से पूरी तरह क्षतिग्रस्त और टूटी हुई दिखाई दे रही है। ऐसी स्थिति में यदि कोई यात्री खराब मौसम या किसी अन्य आपातकालीन कारण से सच्चे जोत में फंस जाता है, तो उसे सुरक्षित आश्रय मिलने की उम्मीद भी नहीं रह जाती।

सच्चे जोत प्रदेश के सबसे कठिन और जोखिम भरे दर्रों में गिना जाता है। यहां मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है और कई बार वाहन तकनीकी खराबी के कारण घंटों तक रास्ते में फंसे रहते हैं। ऐसे समय में यह बंकर यात्रियों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता था, लेकिन इसकी वर्तमान हालत चिंता का विषय बन गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर बंकर के रखरखाव और मरम्मत की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। लोगों ने मांग की है कि आगामी यात्रा सीजन और सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए बंकर की तत्काल मरम्मत कर इसे फिर से उपयोग योग्य बनाया जाए।

क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होती है और यात्रियों को सुरक्षित आश्रय नहीं मिल पाता, तो इसके लिए संबंधित विभाग की लापरवाही जिम्मेदार मानी जाएगी। उन्होंने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से आग्रह किया है कि सच्चे जोत स्थित इस महत्वपूर्ण आपातकालीन बंकर की जल्द से जल्द मरम्मत कर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सच्चे जोत में भारी बर्फबारी, वाहन खराब होने या अन्य किसी आपदा के कारण यात्री फंस जाते हैं, तो उन्हें सुरक्षित आश्रय कहां मिलेगा?
#SachPass #PangiValley #Chamba #HimachalPradesh #PublicWorksDepartment #EmergencyShelter #RoadSafety #TravelerSafety #Infrastructure #MountainRoads #HimalayanRegion #PublicConcern #TouristSafety #Snowfall #BreakingNews #PangiNews #ChambaNews #HimachalNews #DevelopmentIssues #CitizenVoice हिम संदेश Pangi Administration

सच्चे जोत का आपातकालीन बंकर बदहाल, यात्रियों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल पांगी/चम्बा। पांगी घाटी को जिला मुख्यालय चम्बा से जोड़ने वाले दुर्गम एवं महत्वपूर्ण सच्चे जोत मार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा वर्षों पहले एक आपातकालीन बंकर का निर्माण किया गया था। इस बंकर का उद्देश्य खराब मौसम, भारी बर्फबारी, भूस्खलन अथवा वाहन खराब होने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध करवाना था। लेकिन वर्तमान समय में यह बंकर स्वयं बदहाली का शिकार हो चुका है और यात्रियों के लिए किसी भी प्रकार की राहत देने की स्थिति में नहीं है। हाल ही में किए गए निरीक्षण के दौरान बंकर की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। बंकर के अंदर भारी मात्रा में बर्फ जमा हुई है, जिससे इसका अधिकांश हिस्सा उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। वहीं इसकी छत भी कई स्थानों से पूरी तरह क्षतिग्रस्त और टूटी हुई दिखाई दे रही है। ऐसी स्थिति में यदि कोई यात्री खराब मौसम या किसी अन्य आपातकालीन कारण से सच्चे जोत में फंस जाता है, तो उसे सुरक्षित आश्रय मिलने की उम्मीद भी नहीं रह जाती। सच्चे जोत प्रदेश के सबसे कठिन और जोखिम भरे दर्रों में गिना जाता है। यहां मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है और कई बार वाहन तकनीकी खराबी के कारण घंटों तक रास्ते में फंसे रहते हैं। ऐसे समय में यह बंकर यात्रियों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता था, लेकिन इसकी वर्तमान हालत चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर बंकर के रखरखाव और मरम्मत की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। लोगों ने मांग की है कि आगामी यात्रा सीजन और सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए बंकर की तत्काल मरम्मत कर इसे फिर से उपयोग योग्य बनाया जाए। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होती है और यात्रियों को सुरक्षित आश्रय नहीं मिल पाता, तो इसके लिए संबंधित विभाग की लापरवाही जिम्मेदार मानी जाएगी। उन्होंने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से आग्रह किया है कि सच्चे जोत स्थित इस महत्वपूर्ण आपातकालीन बंकर की जल्द से जल्द मरम्मत कर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सच्चे जोत में भारी बर्फबारी, वाहन खराब होने या अन्य किसी आपदा के कारण यात्री फंस जाते हैं, तो उन्हें सुरक्षित आश्रय कहां मिलेगा? #SachPass #PangiValley #Chamba #HimachalPradesh #PublicWorksDepartment #EmergencyShelter #RoadSafety #TravelerSafety #Infrastructure #MountainRoads #HimalayanRegion #PublicConcern #TouristSafety #Snowfall #BreakingNews #PangiNews #ChambaNews #HimachalNews #DevelopmentIssues #CitizenVoice हिम संदेश Pangi Administration

Pangi, Chamba | Jun 2, 2026

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