Karbala History: 5 Muharram की दर्दनाक रात‚ यज़ीदी फौज का बढ़ता दबाव और Imam Hussain का सब्र
🏴 5 मोहर्रम का दर्द... कर्बला में बढ़ा घेराव! 💔
5 मोहर्रम 61 हिजरी का दिन कर्बला के इतिहास में बेहद दर्दनाक माना जाता है। यज़ीद की फौज लगातार बढ़ रही थी और इमाम हुसैन (अ.स.) के खेमों पर दबाव बढ़ता जा रहा था। मगर हक़ के रास्ते पर चलने वाले कभी जुल्म के सामने नहीं झुके।
जब पूरी दुनिया खामोश थी, तब कर्बला में इंसानियत, सब्र और कुर्बानी की सबसे बड़ी मिसाल लिखी जा रही थी। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों ने दुनिया को सिखाया कि सच और इंसाफ़ के लिए हर कुर्बानी छोटी है।
🌹 कर्बला सिर्फ एक जंग नहीं, बल्कि हक़ और बातिल के बीच फैसला करने वाली अज़ीम दास्तान है।
😭 5 मोहर्रम हमें सब्र, इस्तिकामत और अल्लाह पर भरोसे का पैगाम देता है।
🖤 या हुसैन (अ.स.) 🖤
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Parliament Street, New Delhi | Jun 21, 2026