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प्रसव के बाद महिला की मौत से उठे गंभीर सवाल

परिजनों ने स्टाफ नर्स पर रुपये लेने और लापरवाही का लगाया आरोप

जसरा सीएचसी में मातृ मृत्यु के बाद जांच की मांग, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

✒️रिपोर्ट सुनील यादव/राजेश सोनकर

प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के परिजनों ने अस्पताल की स्टाफ नर्स पर अवैध धन वसूली, बाहर से दवाइयां मंगवाने और समय पर रेफर न करने का आरोप लगाया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसूति देखभाल की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है।

डिलीवरी के नाम पर रुपये लेने और दवाएं बाहर से मंगाने का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका गायत्री देवी को सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा में भर्ती कराया गया था। मृतका के पति राजू द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने डिलीवरी कराने के लिए 2500 रुपये की मांग की थी। परिजनों का कहना है कि तत्काल उनके पास 2000 रुपये ही थे, जिन्हें देने के बाद महिला को भर्ती किया गया।

परिजनों के अनुसार भर्ती के बाद कुछ इंजेक्शन और दवाइयां अस्पताल के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर से मंगवाई गईं। इंजेक्शन लगाने के लगभग एक घंटे बाद महिला ने सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म दिया।

प्रसव के बाद बिगड़ी हालत, समय पर रेफर न करने का आरोप

परिवार का आरोप है कि प्रसव के कुछ समय बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्होंने जिला अस्पताल रेफर करने की मांग की, लेकिन कथित तौर पर स्टाफ नर्स ने आश्वस्त किया कि मरीज जल्द ठीक हो जाएगी।

आरोप है कि इसके बाद भी कुछ और दवाइयां बाहर से मंगवाई गईं, लेकिन महिला की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। जब हालत अत्यधिक गंभीर हो गई तो उसे नजदीकी निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।

परिजनों का कहना है कि जब वे महिला को लेकर निजी अस्पताल जा रहे थे, तभी सीएचसी परिसर के भीतर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया।

परिजनों ने चिकित्सीय लापरवाही का लगाया आरोप

मृतका के परिवार ने इस पूरे मामले को चिकित्सीय लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार और रेफरल की व्यवस्था की जाती तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं की नियमित निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया आश्वासन

मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा की अधीक्षिका डॉ. अंकिता पांडेय ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है, लेकिन वर्तमान में वह अवकाश पर हैं और अस्पताल का प्रभार डॉ. सुरेश के पास है।

उन्होंने कहा कि बिना जांच रिपोर्ट के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वायरल फैक्ट

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं, कथित अवैध वसूली और स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। लोगों ने मांग की है कि मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की स्वतंत्र जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

जसरा सीएचसी में हुई यह घटना केवल एक परिवार के लिए व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या वास्तव में किसी स्तर पर लापरवाही हुई। फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

ND NEWS की अपील

🔹 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
🔹 प्रसव संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार की अवैध धन वसूली पर तत्काल कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
🔹 स्वास्थ्य संस्थानों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित ऑडिट और निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
🔹 आमजन स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें।
🔹 प्रत्येक मातृ मृत्यु की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

ND NEWS संदेश:
"एक मां की मृत्यु केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए आत्ममंथन का विषय है। संवेदनशीलता, जवाबदेही और पारदर्शिता ही जनविश्वास की असली नींव है।"
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मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
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अस्वीकरण: यह समाचार परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों, शिकायत पत्र एवं उपलब्ध बयानों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने तक सभी आरोप आरोप मात्र हैं। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होंगे।

प्रसव के बाद महिला की मौत से उठे गंभीर सवाल परिजनों ने स्टाफ नर्स पर रुपये लेने और लापरवाही का लगाया आरोप जसरा सीएचसी में मातृ मृत्यु के बाद जांच की मांग, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप ✒️रिपोर्ट सुनील यादव/राजेश सोनकर प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के परिजनों ने अस्पताल की स्टाफ नर्स पर अवैध धन वसूली, बाहर से दवाइयां मंगवाने और समय पर रेफर न करने का आरोप लगाया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसूति देखभाल की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है। डिलीवरी के नाम पर रुपये लेने और दवाएं बाहर से मंगाने का आरोप प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका गायत्री देवी को सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा में भर्ती कराया गया था। मृतका के पति राजू द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने डिलीवरी कराने के लिए 2500 रुपये की मांग की थी। परिजनों का कहना है कि तत्काल उनके पास 2000 रुपये ही थे, जिन्हें देने के बाद महिला को भर्ती किया गया। परिजनों के अनुसार भर्ती के बाद कुछ इंजेक्शन और दवाइयां अस्पताल के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर से मंगवाई गईं। इंजेक्शन लगाने के लगभग एक घंटे बाद महिला ने सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद बिगड़ी हालत, समय पर रेफर न करने का आरोप परिवार का आरोप है कि प्रसव के कुछ समय बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्होंने जिला अस्पताल रेफर करने की मांग की, लेकिन कथित तौर पर स्टाफ नर्स ने आश्वस्त किया कि मरीज जल्द ठीक हो जाएगी। आरोप है कि इसके बाद भी कुछ और दवाइयां बाहर से मंगवाई गईं, लेकिन महिला की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। जब हालत अत्यधिक गंभीर हो गई तो उसे नजदीकी निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। परिजनों का कहना है कि जब वे महिला को लेकर निजी अस्पताल जा रहे थे, तभी सीएचसी परिसर के भीतर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया। परिजनों ने चिकित्सीय लापरवाही का लगाया आरोप मृतका के परिवार ने इस पूरे मामले को चिकित्सीय लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार और रेफरल की व्यवस्था की जाती तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं की नियमित निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया आश्वासन मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा की अधीक्षिका डॉ. अंकिता पांडेय ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है, लेकिन वर्तमान में वह अवकाश पर हैं और अस्पताल का प्रभार डॉ. सुरेश के पास है। उन्होंने कहा कि बिना जांच रिपोर्ट के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वायरल फैक्ट मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं, कथित अवैध वसूली और स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। लोगों ने मांग की है कि मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की स्वतंत्र जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। जसरा सीएचसी में हुई यह घटना केवल एक परिवार के लिए व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या वास्तव में किसी स्तर पर लापरवाही हुई। फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। ND NEWS की अपील 🔹 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। 🔹 प्रसव संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार की अवैध धन वसूली पर तत्काल कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। 🔹 स्वास्थ्य संस्थानों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित ऑडिट और निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। 🔹 आमजन स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की 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Fatehpur, Fatehpur | Jun 8, 2026

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