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Karbala History: शब-ए-आशूर की दास्तान‚ मासूमो प्यास और आख़िरी पहरा | 9 Muharram | Imam Hussain

🚨 9 मुहर्रम: शब-ए-आशूर की वो दर्दनाक रात, जब हुसैनी ख़ीमों में चराग़ बुझा दिया गया था... 🖤
मुहर्रम की नौवीं तारीख़ आ चुकी है... कर्बला के तपते हुए सहरा (रेगिस्तान) में ज़ुल्म और सितम की इन्तिहा होने वाली है। यह वो दिन है जिसे इतिहास 'यौम-ए-तासूआ' कहता है। हुसैनी कुनबे (परिवार) पर पानी बंद हुए तीन दिन गुज़र चुके हैं। 6 महीने के अली असग़र से लेकर 4 साल की मासूम जनाब-ए-सकीना तक, प्यास की शिद्दत से बिलख रहे हैं।

⚔️ हज़रत अब्बास की वफ़ा और अमान-नामे को ठोकर:
9 मुहर्रम की दोपहर जब ज़ालिम शिम्र यज़ीद की तरफ़ से 'अमान-नामा' (जान की भीख) लेकर आया और हज़रत अब्बास (अ.स.) से कहा कि हुसैन का साथ छोड़ दो तो तुम्हारी जान बख्श दी जाएगी, तब शेर-ए-ख़ुदा के बेटे का ख़ून खौल उठा! उन्होंने उस कागज़ को ठोकर मार दी और फ़रमाया—

"ला'नत हो तुझ पर और तेरी अमान पर! तू हमें अमान देता है और रसूल के नवासे, फ़ातिमा के लाल के लिए कोई अमान नहीं? हम जीते जी अपने भाई और अपने इमाम को तन्हा छोड़ दें? यह कभी नहीं हो सकता!"

🌙 वो आख़िरी रात और चराग़ का बुझाया जाना:
जब यज़ीदी फ़ौज हमला करने बढ़ी, तो इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपनी जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपने रब की इबादत, नमाज़ और क़ुरआन की तिलावत के लिए सिर्फ़ एक रात की मोहलत मांगी।

यह 9 मुहर्रम की वो आख़िरी रात थी जिसे 'शब-ए-आशूर' कहा जाता है। मौला हुसैन ने ख़ीमे का चराग़ (दीया) बुझाकर अपने साथियों से कहा था—"रात का अंधेरा है, जिसे जाना है वो चला जाए, ये लोग सिर्फ़ मेरी जान के दुश्मन हैं।" लेकिन वफ़ादारों ने रोकर कहा—"मौला! अगर हमें सत्तर बार भी शहीद किया जाए, तब भी हम आपका साथ नहीं छोड़ेंगे।"

उस रात ख़ीमों के बाहर हज़रत अब्बास (अ.स.) नंगी तलवार हाथ में लिए पहरा दे रहे थे, यह जानते हुए कि यह पहरेदारी की आख़िरी रात है और अगले दिन (10 मुहर्रम) उन्हें बच्चों के पानी के लिए अपने दोनों बाजू कटवाने हैं।

सलाम हो हुसैन पर, सलाम हो अब्बास पर, और सलाम हो कर्बला के उन 72 जांनिसारों पर जिन्होंने भूख और प्यास की हालत में इस्लाम को हमेशा के लिए ज़िंदा कर दिया। 🙏

👇 अपनी अक़ीदत के फूल पेश करें:
कमेंट बॉक्स में 'या हुसैन' (Ya Hussain) ज़रूर लिखें और इस रूहानी इतिहास को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करके हुसैनियत का पैग़ाम हर घर तक पहुँचाएं।

#9Muharram #ShabeAshura #KarbalaHistory #ImamHussain #HazratAbbas #YaHussain #IslamicHistory #DastakLiveNews #Muharram2026

Karbala History: शब-ए-आशूर की दास्तान‚ मासूमो प्यास और आख़िरी पहरा | 9 Muharram | Imam Hussain 🚨 9 मुहर्रम: शब-ए-आशूर की वो दर्दनाक रात, जब हुसैनी ख़ीमों में चराग़ बुझा दिया गया था... 🖤 मुहर्रम की नौवीं तारीख़ आ चुकी है... कर्बला के तपते हुए सहरा (रेगिस्तान) में ज़ुल्म और सितम की इन्तिहा होने वाली है। यह वो दिन है जिसे इतिहास 'यौम-ए-तासूआ' कहता है। हुसैनी कुनबे (परिवार) पर पानी बंद हुए तीन दिन गुज़र चुके हैं। 6 महीने के अली असग़र से लेकर 4 साल की मासूम जनाब-ए-सकीना तक, प्यास की शिद्दत से बिलख रहे हैं। ⚔️ हज़रत अब्बास की वफ़ा और अमान-नामे को ठोकर: 9 मुहर्रम की दोपहर जब ज़ालिम शिम्र यज़ीद की तरफ़ से 'अमान-नामा' (जान की भीख) लेकर आया और हज़रत अब्बास (अ.स.) से कहा कि हुसैन का साथ छोड़ दो तो तुम्हारी जान बख्श दी जाएगी, तब शेर-ए-ख़ुदा के बेटे का ख़ून खौल उठा! उन्होंने उस कागज़ को ठोकर मार दी और फ़रमाया— "ला'नत हो तुझ पर और तेरी अमान पर! तू हमें अमान देता है और रसूल के नवासे, फ़ातिमा के लाल के लिए कोई अमान नहीं? हम जीते जी अपने भाई और अपने इमाम को तन्हा छोड़ दें? यह कभी नहीं हो सकता!" 🌙 वो आख़िरी रात और चराग़ का बुझाया जाना: जब यज़ीदी फ़ौज हमला करने बढ़ी, तो इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपनी जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपने रब की इबादत, नमाज़ और क़ुरआन की तिलावत के लिए सिर्फ़ एक रात की मोहलत मांगी। यह 9 मुहर्रम की वो आख़िरी रात थी जिसे 'शब-ए-आशूर' कहा जाता है। मौला हुसैन ने ख़ीमे का चराग़ (दीया) बुझाकर अपने साथियों से कहा था—"रात का अंधेरा है, जिसे जाना है वो चला जाए, ये लोग सिर्फ़ मेरी जान के दुश्मन हैं।" लेकिन वफ़ादारों ने रोकर कहा—"मौला! अगर हमें सत्तर बार भी शहीद किया जाए, तब भी हम आपका साथ नहीं छोड़ेंगे।" उस रात ख़ीमों के बाहर हज़रत अब्बास (अ.स.) नंगी तलवार हाथ में लिए पहरा दे रहे थे, यह जानते हुए कि यह पहरेदारी की आख़िरी रात है और अगले दिन (10 मुहर्रम) उन्हें बच्चों के पानी के लिए अपने दोनों बाजू कटवाने हैं। सलाम हो हुसैन पर, सलाम हो अब्बास पर, और सलाम हो कर्बला के उन 72 जांनिसारों पर जिन्होंने भूख और प्यास की हालत में इस्लाम को हमेशा के लिए ज़िंदा कर दिया। 🙏 👇 अपनी अक़ीदत के फूल पेश करें: कमेंट बॉक्स में 'या हुसैन' (Ya Hussain) ज़रूर लिखें और इस रूहानी इतिहास को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करके हुसैनियत का पैग़ाम हर घर तक पहुँचाएं। #9Muharram #ShabeAshura #KarbalaHistory #ImamHussain #HazratAbbas #YaHussain #IslamicHistory #DastakLiveNews #Muharram2026

Parliament Street, New Delhi | Jun 25, 2026

Karbala History: कर्बला का वो शेर जिसके दोनों हाथ कट गए पर मश्कीज़ा नहीं छोड़ा! | 8 Muharram | Abbas

फेसबुक के ऑडियंस को इमोशनल कनेक्ट, पूरी कहानी का छोटा सा ओवरव्यू और साफ-सुथरा लेआउट पसंद आता है। फेसबुक पर वीडियो वायरल करने के लिए टेक्स्ट थोड़ा डिटेल में होना चाहिए ताकि लोग पढ़ते ही वीडियो प्ले कर दें।

यहाँ आपके पेज के लिए 2 बेहतरीन फेसबुक वायरल पोस्ट के ऑप्शंस हैं:

Option 1: इमोशनल और वीडियो-फोकस (सबसे ज्यादा शेयर होने वाला)
8 मोहर्रम: कर्बला का वो शेर जिसके दोनों हाथ कट गए, पर वफ़ा का परचम नहीं झुका! 😭💔

आज मोहर्रम की आठवीं तारीख है। यह वो दिन है जब कर्बला के तपते मैदान में तीन दिन की भूख-प्यास अपनी इन्तेहा (हद) पर थी। जब 4 साल की मासूम बीबी सकीना ने अपना सूखा हुआ मश्कीज़ा (पानी का थैला) अपने चचा अब्बास के हाथों में दिया, तो शेरे-खुदा के बेटे का दिल तड़प उठा।

हज़रत अब्बास अलमदार (अ.स.) यज़ीदी फ़ौज के हज़ारों सिपाहियों को चीरते हुए फरात नदी पर पहुंचे, मश्कीज़ा भरा... लेकिन खुद एक कतरा पानी नहीं पिया, क्योंकि भाई हुसैन और खैमों के बच्चे प्यासे थे!

पर जब वो वापस लौट रहे थे, तो ज़ालिमों ने छुपकर वार किया। गाज़ी अब्बास के दोनों बाज़ू काट दिए गए, मश्कीज़े पर तीर मारा गया... पानी बह गया और साथ ही मासूम सकीना की उम्मीदें भी टूट गईं।

गाज़ी अब्बास की शहादत और 8 मोहर्रम का यह दर्द भरा इतिहास रूह को कंपा देने वाला है। 'दस्तक लाइव न्यूज़' की इस खास वीडियो को पूरा देखें और वफ़ा की इस अज़ीम दास्तान को आगे बढ़ाएं।

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Karbala History: कर्बला का वो शेर जिसके दोनों हाथ कट गए पर मश्कीज़ा नहीं छोड़ा! | 8 Muharram | Abbas फेसबुक के ऑडियंस को इमोशनल कनेक्ट, पूरी कहानी का छोटा सा ओवरव्यू और साफ-सुथरा लेआउट पसंद आता है। फेसबुक पर वीडियो वायरल करने के लिए टेक्स्ट थोड़ा डिटेल में होना चाहिए ताकि लोग पढ़ते ही वीडियो प्ले कर दें। यहाँ आपके पेज के लिए 2 बेहतरीन फेसबुक वायरल पोस्ट के ऑप्शंस हैं: Option 1: इमोशनल और वीडियो-फोकस (सबसे ज्यादा शेयर होने वाला) 8 मोहर्रम: कर्बला का वो शेर जिसके दोनों हाथ कट गए, पर वफ़ा का परचम नहीं झुका! 😭💔 आज मोहर्रम की आठवीं तारीख है। यह वो दिन है जब कर्बला के तपते मैदान में तीन दिन की भूख-प्यास अपनी इन्तेहा (हद) पर थी। जब 4 साल की मासूम बीबी सकीना ने अपना सूखा हुआ मश्कीज़ा (पानी का थैला) अपने चचा अब्बास के हाथों में दिया, तो शेरे-खुदा के बेटे का दिल तड़प उठा। हज़रत अब्बास अलमदार (अ.स.) यज़ीदी फ़ौज के हज़ारों सिपाहियों को चीरते हुए फरात नदी पर पहुंचे, मश्कीज़ा भरा... लेकिन खुद एक कतरा पानी नहीं पिया, क्योंकि भाई हुसैन और खैमों के बच्चे प्यासे थे! पर जब वो वापस लौट रहे थे, तो ज़ालिमों ने छुपकर वार किया। गाज़ी अब्बास के दोनों बाज़ू काट दिए गए, मश्कीज़े पर तीर मारा गया... पानी बह गया और साथ ही मासूम सकीना की उम्मीदें भी टूट गईं। गाज़ी अब्बास की शहादत और 8 मोहर्रम का यह दर्द भरा इतिहास रूह को कंपा देने वाला है। 'दस्तक लाइव न्यूज़' की इस खास वीडियो को पूरा देखें और वफ़ा की इस अज़ीम दास्तान को आगे बढ़ाएं। #8Muharram #HazratAbbas #Shahadat #KarbalaKaWaqia #ImamHussain #Muharram2026 #DastakLiveNews #YaHussain #ViralVideo

Parliament Street, New Delhi | Jun 24, 2026

Karbala History: कर्बला में पानी कब और क्यों बंद हुआ? | Imam Hussain | 4 Muharram | Hazrat Abbas

"चचा जान! मेरी मश्क सूख गई है, सकीना बहुत प्यासी है..." 😭 दरिया बहता रहा और मोहम्मद का कुनबा प्यासा तड़पता रहा!

4 मुहर्रमुल हराम: कर्बला के इतिहास का वो सियाह दिन, जिसे याद करके आज भी हर आंख नम हो जाती है और पत्थर दिल भी रो पड़ता है। कृपया इस दर्दभरी तारीख़ी दास्तान को आगे ज़रूर शेयर करें। 🙏

नाज़रीन, आज ही के दिन कूफ़े के ज़ालिम गवर्नर उबैदुल्लाह इब्ने ज़ियाद के हुक्म पर उमर इब्ने साद ने दरिया-ए-फ़ुरात पर सख़्त पहरा बिठा दिया था। हुक्म था कि मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों तक पानी की एक बूंद भी न पहुँच पाए।

ख़ेमे का वो मंज़र जो रूह कँपा दे:
ज़रा तसव्वुर कीजिए, तपता हुआ रेगिस्तान, आग बरसाता सूरज और इमाम के ख़ेमों में पानी का आख़िरी कतरा भी ख़त्म! ३ साल की मासूम बीवी सकीना (स.अ.) कभी इस ख़ेमे में जातीं, कभी उस ख़ेमे में... वो सूखे बर्तनों को पलट कर देखतीं कि शायद कहीं पानी की एक बूंद मिल जाए, ताकि वो अपने ६ महीने के भाई अली असग़र के सूखे होठों पर टपका सकें। जब पानी नहीं मिलता, तो वो मासूम बच्ची रो कर कहती— "अम्मा! मेरा हलक़ सूख रहा है, कलेजे में आग लग रही है..."

वफ़ा के सुल्तान की बेबसी:
जब ख़ेमों से बच्चों की 'अल-अतश' (प्यास-प्यास) की सिसकियाँ गूंजती थीं, तो शेरे-ख़ुदा के बेटे हज़रत अब्बास (अ.स.) का दिल छल्ली हो जाता था। वो जलाल के समंदर थे, वो चाहते तो एक पल में फ़ुरात का रुख़ मोड़ देते, लेकिन वो अपने भाई और इमाम के हुक्म के पाबंद थे। जब नन्ही सकीना अपनी खाली मश्क लेकर चचा अब्बास के पास आईं, तो वफ़ा के सुल्तान की आँखों से सावन की तरह आँसू बहने लगे।

हुसैनियत का पैग़ाम:
ज़ालिम यज़ीद चाहता था कि प्यास की शिद्दत से टूट कर इमाम हुसैन उसके सामने सर झुका दें। लेकिन हुसैन (अ.स.) तो सब्र का वो पहाड़ थे, जिन्होंने भूखा-प्यासा रहना मंज़ूर किया, अपने भरे-पूरे घर को अपनी आँखों के सामने उजड़ते देखना मंज़ूर किया... लेकिन ज़ुल्म के सामने कभी सर नहीं झुकाया। हुसैन ने सिखाया कि गर्दन कट सकती है, लेकिन हक़ का परचम कभी झुक नहीं सकता।

इस दर्दभरे वाक्ये को पूरा सुनने के लिए वीडियो को आख़िर तक देखें। अगर आले-ए-मोहम्मद की ये अज़ीम क़ुर्बानी आपके दिल को छू गई हो, तो इस पैग़ाम को और मोमिनों तक पहुँचाने के लिए वीडियो को SHARE ज़रूर करें और कमेंट में 'या हुसैन' लिखें।

#4Muharram #Karbala #ImamHussain #HazratAbbas #BibiSakina #Muharram2026 #YaHussain #KarbalaKaItihas #IslamicHistory #UrduBayan #EmotionalVideo

Karbala History: कर्बला में पानी कब और क्यों बंद हुआ? | Imam Hussain | 4 Muharram | Hazrat Abbas "चचा जान! मेरी मश्क सूख गई है, सकीना बहुत प्यासी है..." 😭 दरिया बहता रहा और मोहम्मद का कुनबा प्यासा तड़पता रहा! 4 मुहर्रमुल हराम: कर्बला के इतिहास का वो सियाह दिन, जिसे याद करके आज भी हर आंख नम हो जाती है और पत्थर दिल भी रो पड़ता है। कृपया इस दर्दभरी तारीख़ी दास्तान को आगे ज़रूर शेयर करें। 🙏 नाज़रीन, आज ही के दिन कूफ़े के ज़ालिम गवर्नर उबैदुल्लाह इब्ने ज़ियाद के हुक्म पर उमर इब्ने साद ने दरिया-ए-फ़ुरात पर सख़्त पहरा बिठा दिया था। हुक्म था कि मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों तक पानी की एक बूंद भी न पहुँच पाए। ख़ेमे का वो मंज़र जो रूह कँपा दे: ज़रा तसव्वुर कीजिए, तपता हुआ रेगिस्तान, आग बरसाता सूरज और इमाम के ख़ेमों में पानी का आख़िरी कतरा भी ख़त्म! ३ साल की मासूम बीवी सकीना (स.अ.) कभी इस ख़ेमे में जातीं, कभी उस ख़ेमे में... वो सूखे बर्तनों को पलट कर देखतीं कि शायद कहीं पानी की एक बूंद मिल जाए, ताकि वो अपने ६ महीने के भाई अली असग़र के सूखे होठों पर टपका सकें। जब पानी नहीं मिलता, तो वो मासूम बच्ची रो कर कहती— "अम्मा! मेरा हलक़ सूख रहा है, कलेजे में आग लग रही है..." वफ़ा के सुल्तान की बेबसी: जब ख़ेमों से बच्चों की 'अल-अतश' (प्यास-प्यास) की सिसकियाँ गूंजती थीं, तो शेरे-ख़ुदा के बेटे हज़रत अब्बास (अ.स.) का दिल छल्ली हो जाता था। वो जलाल के समंदर थे, वो चाहते तो एक पल में फ़ुरात का रुख़ मोड़ देते, लेकिन वो अपने भाई और इमाम के हुक्म के पाबंद थे। जब नन्ही सकीना अपनी खाली मश्क लेकर चचा अब्बास के पास आईं, तो वफ़ा के सुल्तान की आँखों से सावन की तरह आँसू बहने लगे। हुसैनियत का पैग़ाम: ज़ालिम यज़ीद चाहता था कि प्यास की शिद्दत से टूट कर इमाम हुसैन उसके सामने सर झुका दें। लेकिन हुसैन (अ.स.) तो सब्र का वो पहाड़ थे, जिन्होंने भूखा-प्यासा रहना मंज़ूर किया, अपने भरे-पूरे घर को अपनी आँखों के सामने उजड़ते देखना मंज़ूर किया... लेकिन ज़ुल्म के सामने कभी सर नहीं झुकाया। हुसैन ने सिखाया कि गर्दन कट सकती है, लेकिन हक़ का परचम कभी झुक नहीं सकता। इस दर्दभरे वाक्ये को पूरा सुनने के लिए वीडियो को आख़िर तक देखें। अगर आले-ए-मोहम्मद की ये अज़ीम क़ुर्बानी आपके दिल को छू गई हो, तो इस पैग़ाम को और मोमिनों तक पहुँचाने के लिए वीडियो को SHARE ज़रूर करें और कमेंट में 'या हुसैन' लिखें। #4Muharram #Karbala #ImamHussain #HazratAbbas #BibiSakina #Muharram2026 #YaHussain #KarbalaKaItihas #IslamicHistory #UrduBayan #EmotionalVideo

Parliament Street, New Delhi | Jun 20, 2026

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