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सीएमओ

बंद पड़े पीपीसी में कर दिया ट्रांसफर!

18 साल से एक ही सीएचसी में तैनाती, अब 'कागजों में' स्थानांतरण का आरोप; सीएमओ कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

जनपद जालौन का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 

इस बार मामला शासन की स्थानांतरण नीति के कथित उल्लंघन और आईजीआरएस शिकायत के बाद जारी हुए स्थानांतरण आदेश को लेकर है।
 शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि करीब 18 वर्षों से सीएचसी जालौन में तैनात चीफ फार्मासिस्ट को वास्तव में हटाने के बजाय केवल कागजों में ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीपीसी) से संबद्ध दिखा दिया गया, जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं संचालित ही नहीं हो रहीं।

शिकायत के अनुसार शासन का उद्देश्य वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों का वास्तविक स्थानांतरण कर प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। लेकिन आरोप है कि इस मामले में आदेश की मंशा को दरकिनार करते हुए केवल औपचारिक कार्रवाई कर दी गई, जिससे संबंधित कर्मचारी उसी व्यवस्था में बने रहे।

मामला आईजीआरएस शिकायत संख्या 60000260159142 से जुड़ा है। शिकायत के निस्तारण में सीएमओ कार्यालय ने बताया कि महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में 1 जुलाई 2026 को स्थानांतरण आदेश जारी किया गया। 
लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस पीपीसी में स्थानांतरण दिखाया गया है, वहां न नियमित चिकित्सकीय व्यवस्था है और न ही प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं। 
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तविक स्थानांतरण है या केवल कागजी औपचारिकता?

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थानांतरण आदेश के बाद भी संबंधित कर्मचारी ने सीएचसी का कार्यभार पूरी तरह नहीं छोड़ा।
 यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो विभागीय आदेशों के पालन और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

अब शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। 
उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित पीपीसी की वास्तविक स्थिति क्या है, वहां स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं या नहीं, कर्मचारी ने वास्तव में कार्यभार ग्रहण किया या नहीं, और स्थानांतरण केवल अभिलेखों तक सीमित रहा या धरातल पर भी लागू हुआ।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी, आदेशों की अवहेलना या अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाए। 
उनका कहना है कि यदि इस प्रकार केवल कागजों में स्थानांतरण कर शासन के आदेशों को निष्प्रभावी बनाया जाता रहा तो स्थानांतरण नीति की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे।

नोट: इस समाचार में प्रकाशित आरोप शिकायतकर्ता एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। 
मामले की आधिकारिक पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

 अब आपकी बारी...

क्या अगर कोई पीपीसी वास्तव में बंद या निष्क्रिय है, तो वहां किया गया स्थानांतरण प्रभावी माना जाना चाहिए?

क्या वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों के मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है?

 आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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बंद पड़े पीपीसी में कर दिया ट्रांसफर! 18 साल से एक ही सीएचसी में तैनाती, अब 'कागजों में' स्थानांतरण का आरोप; सीएमओ कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल जनपद जालौन का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला शासन की स्थानांतरण नीति के कथित उल्लंघन और आईजीआरएस शिकायत के बाद जारी हुए स्थानांतरण आदेश को लेकर है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि करीब 18 वर्षों से सीएचसी जालौन में तैनात चीफ फार्मासिस्ट को वास्तव में हटाने के बजाय केवल कागजों में ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीपीसी) से संबद्ध दिखा दिया गया, जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं संचालित ही नहीं हो रहीं। शिकायत के अनुसार शासन का उद्देश्य वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों का वास्तविक स्थानांतरण कर प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। लेकिन आरोप है कि इस मामले में आदेश की मंशा को दरकिनार करते हुए केवल औपचारिक कार्रवाई कर दी गई, जिससे संबंधित कर्मचारी उसी व्यवस्था में बने रहे। मामला आईजीआरएस शिकायत संख्या 60000260159142 से जुड़ा है। शिकायत के निस्तारण में सीएमओ कार्यालय ने बताया कि महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में 1 जुलाई 2026 को स्थानांतरण आदेश जारी किया गया। लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस पीपीसी में स्थानांतरण दिखाया गया है, वहां न नियमित चिकित्सकीय व्यवस्था है और न ही प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तविक स्थानांतरण है या केवल कागजी औपचारिकता? शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थानांतरण आदेश के बाद भी संबंधित कर्मचारी ने सीएचसी का कार्यभार पूरी तरह नहीं छोड़ा। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो विभागीय आदेशों के पालन और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। अब शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित पीपीसी की वास्तविक स्थिति क्या है, वहां स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं या नहीं, कर्मचारी ने वास्तव में कार्यभार ग्रहण किया या नहीं, और स्थानांतरण केवल अभिलेखों तक सीमित रहा या धरातल पर भी लागू हुआ। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी, आदेशों की अवहेलना या अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि इस प्रकार केवल कागजों में स्थानांतरण कर शासन के आदेशों को निष्प्रभावी बनाया जाता रहा तो स्थानांतरण नीति की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे। नोट: इस समाचार में प्रकाशित आरोप शिकायतकर्ता एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। मामले की आधिकारिक पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। अब आपकी बारी... क्या अगर कोई पीपीसी वास्तव में बंद या निष्क्रिय है, तो वहां किया गया स्थानांतरण प्रभावी माना जाना चाहिए? क्या वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों के मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है? आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #BreakingNews #Jalaun #Urai #CMOJalaun #HealthDepartment #TransferPolicy #IGRS #CHCJalaun #PPCJalaun #ChiefPharmacist #UttarPradesh #HealthSystem #AdministrativeTransparency #Investigation #Accountability #PublicInterest #GovernmentOrders #JalaunNews #HindiNews #LatestNews #GroundReport #SonuMaharaj #NewsUpdate #स्वास्थ्य_विभाग #सीएमओ #स्थानांतरण_विवाद #आईजीआरएस #जालौन #उरई #जनहित

Kalpi, Jalaun | Jul 8, 2026

*_गोपनीय सूत्र "अपडेट न्यूज...* 

*भरत को मिला संतोष का दण्ड, सीएमओ ने सिखाया अनुशासन का पाठ*

*_"सीएचसी अधीक्षक डॉ भरत से छिना प्रभार, सीएमओ कार्यालय संबद्ध", डॉ0 संतोष गुप्ता ने सिखाया अनुशासन का पाठ_*

*_"अपने बड़बोले बयान पर सीएचसी अधीक्षक डॉ भरत को मिला सबक!", उच्च अधिकारियों पर लगाए थे ट्रांसफर के नाम पर ₹ 6 लाख मांगने का आरोप_*

*_"डॉ राजेन्द्र को मिला पलिया सीएचसी का प्रभार"_*

*चार्ज देने से बचने के बहाने तलाश रहे डॉक्टर भरत सिंह, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीमारी के बहाने चार्ज देने में हीला हवाली की मंसा से स्वयं को बीमार साबित करने पर तुले डॉक्टर भरत*

*वही सीएमओ खीरी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि चिकित्सक व कर्मचारी अस्पताल में पूरे अनुशासन के साथ रहें। अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी*

*_"41 सेकेंड के वाइरल वीडियो के बाद हरकत में आया प्रशासन "ल

*_सूत्रों से....* #सीएमओ #derctorofhealth #फ़ॉलोअर्स #viralreel #facebookreel #हाइलाइट्स 
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*_गोपनीय सूत्र "अपडेट न्यूज...* *भरत को मिला संतोष का दण्ड, सीएमओ ने सिखाया अनुशासन का पाठ* *_"सीएचसी अधीक्षक डॉ भरत से छिना प्रभार, सीएमओ कार्यालय संबद्ध", डॉ0 संतोष गुप्ता ने सिखाया अनुशासन का पाठ_* *_"अपने बड़बोले बयान पर सीएचसी अधीक्षक डॉ भरत को मिला सबक!", उच्च अधिकारियों पर लगाए थे ट्रांसफर के नाम पर ₹ 6 लाख मांगने का आरोप_* *_"डॉ राजेन्द्र को मिला पलिया सीएचसी का प्रभार"_* *चार्ज देने से बचने के बहाने तलाश रहे डॉक्टर भरत सिंह, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीमारी के बहाने चार्ज देने में हीला हवाली की मंसा से स्वयं को बीमार साबित करने पर तुले डॉक्टर भरत* *वही सीएमओ खीरी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि चिकित्सक व कर्मचारी अस्पताल में पूरे अनुशासन के साथ रहें। अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी* *_"41 सेकेंड के वाइरल वीडियो के बाद हरकत में आया प्रशासन "ल *_सूत्रों से....* #सीएमओ #derctorofhealth #फ़ॉलोअर्स #viralreel #facebookreel #हाइलाइट्स ✍️✍️✍️

Lakhimpur, Lakhimpur Kheri | Jun 22, 2026

#गुना #नगर_परिषद #अध्यक्षा व #सीएमओ के #रवैये से #नाराज #सफाईकर्मी #बैठे #धरने पर

#गुना #नगर_परिषद #अध्यक्षा व #सीएमओ के #रवैये से #नाराज #सफाईकर्मी #बैठे #धरने पर

Anupshahr, Bulandshahr | May 21, 2026

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