बाल दिवस पर स्कूलों और संस्थानों में रंग-बिरंगी प्रस्तुतियों, सेल्फियों और समारोहों की रौनक के बीच शहर की सड़कों पर एक दर्दनाक हकीकत खुलेआम मुंह चिढ़ा रही है। चौक-चौराहों पर फटे कपड़ों में भीख मांगते नन्हे बच्चे और गोद में शिशुओं को लिए भटकती महिलाएं- यह दृश्य बताता है कि बाल संरक्षण व्यवस्था कितनी खोखली हो चुकी है। एसी दफ्तरों में योजनाओं की फाइलें घूमती है