पारंपरिक फाग गीतों की मधुर स्वर-लहरियां वातावरण में गूंजती रहती थीं। गांव की चौपाल पर “राम खेले होली, लखन खेले होली” और “गोरिया करी के श्रृंगार, पिसे ले चलली हरदिया” जैसे पारंपरिक फागुन गीतों के साथ ढोल-मंजीरे की थाप पर लोग झूम उठते थे। इन गीतों में लोक संस्कृति, आस्था और प्रेम का अनोखा संगम देखने को मिलता था।