इससे जीव आवश्यक होने वाले कष्टों से बच जाता है। मनुष्य के जीवन का आचरण ऐसा हो कि आपके जीवन से किसी को कष्ट न हो तो स्वयं को भी कष्ट नहीं होगा। साधु अपनी जीवनचर्या में अपने आचरण से कष्ट नहीं होने देते। प्राणी मात्र को सुख, समृद्धि व शांति के लिए जीव हिंसा से बचते हुए सात्विक आहार लेना चाहिए जानकारी गुरुवार शाम 6 बजे मिली